मराठों का उत्तकर्ष – MP GK IN Hindi

  • मराठों के उत्कर्ष और ईस्ट इणि्डया कम्पनी के आगमन के साथ मध्य प्रदेश के इतिहास में एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ ।
  • पेशवा बाजीरात ने उत्तर भारत की विजय योजना को प्रारम्भ किया ।
  • अतः मध्य प्रदेश पर अधिकार अवश्यम्भावी था
  • कालान्तर में अनेक घटनाक्रमों के उपरान्त चम्पतराय के पुत्र छत्रसाल ने दमोह, जबलपुर, धामोनी, शहगढ़. सियलासा, गुना और गवालियर क्षेत्र प्रदान किए
  • अंग्रेजों ने मराठों के साथ पहले, दूसरे, तीसरे और चौथे युद्धों में क्रमशः पेशवा, होल्कर, सिंधिया तथा भोंसले को पराजित किया ।
  • अंग्रेजों ने सिंधिया से हरदा, टिमरनी एवम् खण्डवा छीनकर मध्य प्रान्त में सम्मिलित किया
  • होल्कर, सिंधिया राजवंशों का ऐतिहासिक युग सन् 1948 ई. तक प्रभावी रहा तथा बाद में सरदार वल्लभभाई पटेल के दबाव तथा माउण्टबेटन की सलाह से 22 अप्रैल, 1948 को 22 रियासतों और तीन राजवंशों ने भारतीय संघ में विलय के अनुबन्ध पर संयुक्त हस्ताक्षर किए ।
  • इसके बाद मध्य प्रदेश के नाम से एक नवीन राज्य की स्थापना हुई।
  • गढ़मण्डला में गोंड राजा नरहरिशाह का शासन था ।
  • मराठो के साथ संघर्ष में आबा साहब मोये व बापूजी नारायण ने उसे पराजित किया ।
  • कालान्तर में पेशवा ने रघुजी भोंसले को इथर का क्षेत्र दे दिया ।
  • यह व्यवस्था अधिक समय तक नहीं टिक सकी । अंग्रेज सारे देश में अपना प्रभाव बढ़ाने लगे थे ।
  • मराठों की आन्तरिक कलह से उन्हें हस्तक्षेप का अवसर मिला ।
  • 1818 ई. में पेशवा को पराजित कर अंग्रेजों ने जबलपुर व सागर क्षेत्र रघुजी भोंसले से हथिया लिए थे ।
  • 1817 ई. लाई हेस्टिंगस ने नागप़र व नर्मदा के उत्तर का सारा क्षेत्र मराठों से छीन लिया था ।
  • उनमें निजाम का बरार क्षेत्र भी सम्मिलित कर लिया था
  • इस प्रकार अंग्रेजों ने मध्य प्रान्त व बरार का मिला- जुला प्रान्त बनाया।
  • महाराजा छत्रसाल की मृत्यु के बाद विंध्य प्रदेश-पन्ना, रीवा, बिजावर, अजयगढ़, नागोद आदि छोटी-बड़ी रियासतों में विभक्त हो गया था
  • अंग्रेजों ने पृथक् -पृथक संधियाँ कर इन रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य के संरक्षण में ले लिया था ।

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