बंबई में राजनीतिक संस्थाएँ

बंबई एसोसिएशन

  • स्थापना :- 26 अगस्त, 1852
  • संस्थापक :- दादाभाई नौरोजी
  • दादाभाई नौरोजी ने कलकत्ता के ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की तर्ज पर ‘बंबई एसोसिएशन’ की स्थापना की।
  • इस संगठन का मुख्य उद्देश्य सरकार को समय-समय पर ज्ञापन देना था, ताकि भेदभावपूर्ण समझे जाने वाले नियमों तथा सरकारी नीतियों के लिये सुझाव दिये जा सकें।
  • इस संस्था ने भी अंग्रेजी संसद को एक ज्ञापन भेजा जिसमें नई विधान परिषदों, जिनमें भारतीयों को भी प्रतिनिधित्व मिले, के बनाए जाने की बात की। उन्होंने भारतीयों की ऊँचे पदों पर नियुक्तियाँ न करने और अंग्रेज़ अधिकारियों को बड़े-बड़े वेतन देने की भी निंदा की। हालांकि, यह एसोसिएशन बहुत दिनों तक नहीं चल सका।

पूना सार्वजनिक सभा

  • स्थापना :- 1867 (कुछ स्रोतों में 1870)
  • संस्थापक :- महादेव गोविंद रानाडे (एम.जी. रानाडे) एवं गणेश वासुदेव जोशी
  • इस सभा का उद्देश्य जनता को यह बताना था कि सरकार के वास्तविक उद्देश्य क्या हैं? अपने अधिकार कैसे प्राप्त किये जा सकते हैं। 1875 में इस संस्था ने ब्रिटिश संसद में भारतीयों के प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व की मांग करते हुए हाउस ऑफ कॉमंस के समक्ष याचिका प्रस्तुत की। इस सभा के सक्रिय सदस्यों में एस.एच. साठे तथा एस.एच. चिपलूणकर थे।
  • पूना सार्वजनिक सभा मुख्यतः नवोदित मध्यम वर्ग, ज़मींदारों और व्यापारियों के हितों का प्रतिनिधित्व करती थी। इसके अधिकांश सदस्य ब्राह्मण व वैश्य थे। इसी कारण यह संस्था किसानों तक अपनी पहुँच नहीं बना सकी।

बंबई प्रेसिडेंसी एसोसिएशन

  • स्थपना :- 1885
  • संस्थापक :- फिरोजशाह मेहता, बदरुद्दीन तैय्यबजी व के.टी. तैलंग द्वारा
  • 1885 में बंबई में नागरिकों की एक सभा जमशेदजी जीजी भाई की अध्यक्षता में बुलाई गई। इसी सभा में इस संगठन के गठन की घोषणा की गई। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों के मध्य राजनीतिक विचारों को फैलाना था।

मद्रास नेटिव एसोसिएशन

  • स्थापना :- 1852 में
  • संस्थापक :- गजुलू लक्ष्मीनरसु चेट्टी
  • कलकत्ता के ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की शाखा 1852 में मद्रास में स्थापित की गई। इसकी स्थापना गजुलू लक्ष्मीनरसु चेट्टी ने की थी।
  • इस संस्था ने अंग्रेजी संसद को 1853 के चार्टर से पूर्व एक ज्ञापन _भेजा जो बंबई तथा कलकत्ता एसोसिएशन के नमूने पर आधारित था।

मद्रास महाजन सभा

  • स्थापना : 1884
  • संस्थापक : जी एस अय्यर, एम् विरंघवाचारी और आनंद चारलु
  • 1884 में एम. वीर राघवाचारी, जी. सुब्रह्मण्यम् अय्यर और पी. आनंद चालू ने मद्रास महाजन सभा की स्थापना की थी।
  • इसका उद्देश्य स्थानीय संगठनों के कार्यों को समन्वित करना था।
  • इसका पहला सम्मेलन 29 दिसंबर, 1884 से 2 जनवरी, 1885 तक मद्रास में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में विधान परिषदों के सुधार, कार्यपालिका से न्यायपालिका के अलगाव तथा खेतिहरों की हालातों पर विचार-विमर्श किया गया।

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