राष्ट्रीय सुचना आयोग|National Information Commission

सूचना आयोग का गठन

केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, केंद्रीय सूचना आयोग के नाम से एक निकाय का गठन करेगी, जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो उसे इस अधिनियम के अधीन प्रदान की जाए।

केंद्रीय सूचना आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा –

1.मुख्य सूचना आयुक्त
2. सूचना आयुक्त जिनकी संख्या 10 से अधिक नहीं होगी तथा आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किए जाएंगे। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा निम्नलिखित से मिलकर बनी समिति की सिफारिश पर की जाएगी-
A. प्रधानमंत्री, जो समिति का अध्यक्ष होगा
B. लोकसभा में विपक्ष का नेता
नोट – यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता को उस समय मान्यता नहीं दी गई है तो वहां लोकसभा में सरकार के विपक्षी दल का सबसे बडे समूह का नेता विपक्ष का नेता समझा जाएगा।
C. प्रधानमंत्री द्वारा नाम निर्दिष्ट संघ मंत्रिमंडल का एक मंत्री।

  • केंद्रीय सूचना आयोग के कार्यों का साधारण अधीक्षण, निर्देशन और प्रबंधन, मुख्य सूचना आयुक्त में निहित होगा, जिसकी सहायता सूचना आयुक्तों द्वारा की जाएगी और वहां ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे सभी कार्य और बातें कर सकेगा, जिनका केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा स्वतंत्र रूप से इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य प्राधिकारी के निर्देशों के अधीन रहे बिना प्रयोग किया जा सकता है या जो की जा सकती है।
  • मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त विधि, विधान, प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंध, पत्रकारिता, जनसंपर्क माध्यम या प्रशासन तथा शासन का व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले जनजीवन में प्रख्यात व्यक्ति होंगे।
  • मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त, यथास्थिति, संसद का सदस्य या किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के विधान मंडल का सदस्य नहीं होगा या कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं करेगा या किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होगा अथवा कोई कारोबार नहीं करेगा या कोई वृत्ति नहीं करेगा।
  • केंद्रीय सूचना आयोग का मुख्यालय दिल्ली में होगा और केंद्रीय सूचना आयोग, केंद्र सरकार के पूर्व अनुमोदन से भारत में अन्य स्थानों पर कार्यालय स्थापित कर सकेगा।

पदावधी और सेवा की शर्ते

  1. सूचना का अधिकार संशोधन अधिनियम 2019 के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य सूचना आयुक्तों का कार्यकाल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
  2. सूचना आयुक्त के रूप में पुनः नियुक्ति के लिए अपात्र होगा, परंतु प्रत्येक सूचना आयुक्त अपना पद रिक्त करने पर विनिर्दिष्ट नीति से मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होगा
  3. मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त, अपने पद ग्रहण करने से पूर्व राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस नामित किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष पहली अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए उप वर्णित प्रारूप के अनुसार एक शपथ या प्रतिज्ञा लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा।
  4. मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त, किसी भी समय, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।
  5. संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य निर्बंधन और शर्तें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।
    मूल कानून में प्रावधान था कि मुख्य सूचना आयुक्त तथा अन्य सूचना आयुक्त होते समय उम्मीदवार किसी अन्य सरकारी नौकरी की पेंशन या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करता है तो उस लाभ के बराबर राशि को उसके वेतन से हटा दिया जाएगा, लेकिन नए संशोधन में इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
  6. केंद्रीय सरकार मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त को उतने अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने इस अधिनियम के अधीन उनके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हो और नियुक्त किए गए कर्मचारियों के वेतन और भत्ते वही होंगे जो निर्धारित किए जाएं।

मुख्य सूचना आयुक्त या किसी अन्य सूचना आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया

  1. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 14 के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त या किसी सूचना आयुक्त को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से तभी हटाया जाएगा, जब उच्चतम न्यायालय ने, राष्ट्रपति द्वारा उसे किए गए किसी निर्देश पर जांच के पश्ञात यह रिपोर्ट दे दी होगी, यथास्थिति मुख्य सूचना आयुक्त यह सूचना आयुक्त को इस आधार पर हटा दिया जाना चाहिए ।
  2. राष्ट्रपति उस मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को जिसके विरुद्ध उच्चतम न्यायालय को निर्देश किया गया है, ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राष्ट्रपति द्वारा आदेश पारित किए जाने तक पद से निलंबित कर सकेगा और यदि आवश्यक समझे तो जांच के दौरान कार्यालय में उपस्थित होने से भी मना कर सकेगा
  3. राष्ट्रपति निम्नलिखित आधार पर भी मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्तों को उसके पद से हटा सकेगा।
    A. दिवालिया या न्याय निर्णित किया गया है
    B. या ऐसे अपराध के लिए दोष सिद्ध ठहराया गया है, जिसमे राष्ट्रपति के राय में नैतिक अधमता शामिल है।
    C. अपनी पदावधी के दौरान, अपने पद के कर्तव्यों से अलग कहीं और से वेतन प्राप्त करने में लगा हो।
    D. राष्ट्रपति की राय में, मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण पद पर बने रहने के योग्य ना हो
    E. उसने ऐसे वित्तीय और अन्य हित अर्जित किए हैं जिनसे मुख्य सूचना आयुक्त या किसी सूचना आयुक्त के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है
  4. यदि मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त, किसी प्रकार भारत सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा या करार से संबद्ध या उसमें हितबद्ध है या किसी निगमित कंपनी के किसी सदस्य के रूप से अन्यथा और उसके अन्य सदस्यों के साथ सामान्यता उसके लाभ में या उससे प्रोदभूत होने वाले किसी फायदे या परीलवधियो में हिस्सा लेता है तो यह प्रायोजन के लिए कदाचार का दोषी नहीं समझा जाएगा।

सूचना आयोग से संबंधित अन्य तथ्य

  1. केंद्रीय सूचना आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 2005 को की गई थी, इसका मुख्यालय दिल्ली में है।
  2. भारत के प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त वजहत हबीबुल्लाह थे।

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