राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग | National Commission for Scheduled Castes

वर्ष 1978 में मंत्रिमंडल के प्रस्ताव द्वारा एक गैर सांविधिक निकाय के रूप में अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग की स्थापना की गई। 65 वें संविधान संशोधन 1990 द्वारा एक बहू सदस्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग की स्थापना की गई तथा इसे संवैधानिक आयोग का दर्जा प्रदान किया गया| इनका वर्णन भारतीय संविधान के अनुचछेद 338 में है।
बाद में 89 वे संविधान संशोधन 2003 के द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग को पृथक कर दिया गया। अतः सन 2004 से पृथक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अस्तित्व में आया। इसका वर्णन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 में किया गया है।

अनुचछेद 338

  1. अनुसूचित जातियों के लिए एक आयोग होगा, जो राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के नाम से जाना जाएगा।
  2. संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधो के अधीन रहते हुए आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष तीन अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा और इस प्रकार नियुक्त किए गए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधी ऐसी होगी जो राष्ट्रपति नियम द्वारा निर्धारित करें।
  3. राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों को नियुक्त करेगा।
  4. अध्यक्ष अनुसूचित जाति का सदस्य होना चाहिए जो प्रसिद्ध राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हो।

अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल

अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल के बारे में राष्ट्रपति निर्धारित करेगा तथा उन्हें पुनः अपने पद पर नियुक्त किया जा सकता है, परंतु 2 बार से अधिक इन्हें अपने पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता

अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है एवं उपाध्यक्ष को केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है।

अनुसूचित जाति आयोग के कार्य

  1. संविधान में अनुसूचित जाति के हितों की रक्षा से संबंध विषयों की जांच वा उनकी निगरानी करना तथा अनुसूचित जाति के अधिकारों के हनन की शिकायत की जांच करना आयोग के प्रमुख कार्य है।
  2. इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे।
    A. अनुसूचित जातियों के लिए संविधान अथवा भारत सरकार के किसी आदेश के अधीन किए गए, रक्षा उपायों से संबंधित सभी विषयों की जांच करना व उन पर किए गए रक्षा उपायों के क्रियान्वयन का मूल्यांकन करना।
    B. अनुसूचित जातियों को उनके अधिकारों और रक्षा उपायों से वंचित किए जाने की शिकायत की जांच करना।
    C. ऐसे उपबंधो के क्रियान्वयन के विषय में प्रतिवर्ष अथवा जब भी आवश्यक हो आयोग द्वारा राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देना
    D. अनुसूचित जातियों के संरक्षण, सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण तथा विकास के लिए अनुशंसा करना।
    E. अनुसूचित जाति के कल्याण संबंधित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की निगरानी करना

नोट

  1. संघ सरकार और राज्य सरकार के द्वारा अनुसूचित जाति उनसे संबंधित नीतियों का निर्माण करते समय आयोग से परामर्श लिया जाएगा। आयोग अनुसूचित जाति के सामाजिक एवं आर्थिक विकास से संबंधित नियोजन की प्रक्रिया में भी सलाह देगा एवं सहभागिता करेगा|
    2.राज्यों में प्रथक अनुसूचित जाति आयोग की स्थापना नहीं की जाती है। इसलिए राज्यों के द्वारा अनुसूचित जातियों के कल्याण तथा उनके हितों के संरक्षण के संबंधों में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से सलाह ली जाती है और भविष्य में नीतियों के निर्माण के लिए भी आयोग द्वारा सलाह दी जाती है।

आयोग की शक्तियां

किसी मामले की जांच करते समय आयोग के पास सिविल न्यायालय की शक्तियां होगी जो कि निम्न है –

  1. भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसका परीक्षण करना ।
  2. किसी दस्तावेज को प्रकट करना और प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना
  3. किसी दस्तावेज को प्रकट करना और प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना
  4. शपथ पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना।
  5. किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अपेक्षा करना ।
  6. साक्ष्यों और दस्तावेजों के परीक्षण के लिए समन निकालना
  7. कोई अन्य विषय जो राष्ट्रपति निर्धारित करें

अनुसूचित जाति आयोग से संबंधित अन्य तथ्य

  1. आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है। वह जब भी उचित समझें अपनी रिपोर्ट दे सकता है।
  2. राष्ट्रपति किसी राज्य सरकार से संबंधित आयोग के प्रतिवेदन को भी राज्य के राज्यपाल के पास भेजते हैं। राज्यपाल इस आयोग की सिफारिश पर की गई कार्यवाही का उल्लेख करते हुए ज्ञापन के साथ राज्य विधानमंडल के पटल पर रखते हैं। ऐसे ज्ञापन में ऐसे किसी सिफारिशों को स्वीकार नहीं किए जाने का कारण भी होना चाहिए।
  3. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के 12 राज्य स्तरीय कार्यालय भारत में स्थित है
  4. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के प्रथम अध्यक्ष तथा इसके वर्तमान अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया है।

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