मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उधान एवं अभयारण

  • प्रदेश में कुल 11 राष्ट्रीय उद्यान है एवं 24 वन्यजीव अभ्यारण्य हैं | जबकि 4 राष्ट्रीय उद्यान 5 वन्यजीव अभ्यारण्य प्रस्तावित हैं ।
  • प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल 10.99 हजार वर्ग किमी. है।
  • मध्यप्रदेश में 1974 से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लागू है।
  • राष्ट्रीय उद्यान – इनकी स्थापना वन्यजीवों को प्राकृतिक क्षेत्र में सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य की जाती है। ये ऐसे आरक्षित क्षेत्र होते हैं जिनमें सभी प्रकार की मानवीय गतिविधि प्रतिबंधित होती है
  • भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान 1936 में स्थापित हेली नेशनल पार्क था, जिसे अब जिम कार्बेट (उत्तराखंड) के नाम से जाना जाता है।
  • वन्यजीव अभयारण्य – यह से संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहां वन्‍यजीवों को प्राकृतिक एवं सुरक्षित वातावरण में रखा जाता है, इनमें मानव गतिविधियों को सीमित रूप से अनुमति दी जाती है, जबकि राष्ट्रीय उद्यान में सभी प्रकार की मानव गतिविधियां प्रतिबंधित होती है।
  • भारत का पहला वन्य जीव अभ्यारण्य मिथानामा वन्य जीव अभ्यारण्य था, जो 1887 में सिक्किम में स्थापित किया गया था।
  • बाघ आकलन रिपोर्ट 2018 के अनुसार मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या 526 है, जो देश में सर्वाधिक है इस प्रकार मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा पुनः प्राप्त हो गया है। दूसरे स्थान पर कर्नाटक (524 बाघ) तथा तीसरे स्थान पर उत्तराखंड (442 बाघ) है।

राष्ट्रीय उद्यान

कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान, मंडला

  • कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान मंडला जिले के अंतर्गत आता है।
  • यह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान हैं, जो लगभग 940 वर्ग किमी में फैला हुआ है
  • यह मध्य प्रदेश का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, इसे सन्‌ 1932 में अभ्यावन, 1952 में अभ्यारण्य तथा 1955 में नेशनल पार्क बनाया गया।
  • कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश का सर्वप्रथम राष्ट्रीय उद्यान है जिसे 1974 में प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया |
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में ब्रेडरी प्रजाति का बारहसिंघा पाया जाता है, जो भारत के केवल इसी राष्ट्रीय उद्यान में है।
  • यह मार्च 2017 में भारत का पहला ऐसा , टाइगर रिजर्व बना जिसने आधिकारिक रूप से एक शुभंकर जारी किया जिसका नाम भूर सिंह है और यह एक बारहसिंगा है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में बारहसिंगा, चीतल, चिंगार, बाघ, तेंदुआ, भालू आदि जानवर पाए जाते हैं ।
  • यहां पर हालो घाटी तथा बंजर घाटी प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं ।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में अमेरिका की नेशनल पार्क सर्विस की सहायता से पार्क इंटरप्रीटेंशन योजना चल रही है ।
  • “जंगल गलियारा योजना” के तहत कान्हा किसली तथा बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान को जोड़ा जाना है।

पेंच राष्ट्रीय उद्यान, सिवनी – छिंदवाड़ा

  • यह सिवनी – छिन्दवाड़ा जिले तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है| इसे इंदिरा गाँधी प्रियदर्शनी पार्क भी कहा जाता हैं ।
  • नोट – इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय उद्यान तमिलनाड़ में है ।
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 293 वर्ग किमी है।
  • वर्ष 1977 में 449.39 वर्ग कि.मी. वन क्षेत्र को पेंच अभ्यारण्य क्षेत्र घोषित किया गया था । वर्ष 1983 में इसमें से 292.850 वर्ग कि.मी. क्षेत्र को पेंच राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया था, एवं 118.47 वर्ग कि.मी. क्षेत्र पेंच अभ्यारण्य के रूप में रखा गया ।
  • वर्ष 1992 में भारत सरकार द्वारा पेंच राष्ट्रीय उद्यान, पेंच अभ्यारण्य एवं कुछ अन्य वन क्षेत्रों को सम्मिलित कर 757.850 वर्ग कि.मी. क्षेत्र को देश का 19 वां प्रोजेक्ट टाईगर रिजर्व बनाया गया।
  • वर्ष 2002 में पेंच राष्ट्रीय उद्यान एवं पेंच अभ्यारण्य का नाम क्रमशः इंदिरा प्रियदर्शनी पेंच राष्ट्रीय उद्यान एवं पेंच मोगली अभ्यारण्य
  • रखा गया।
  • पेंच नदी इस अभ्यारण्य से होकर बहती है।
  • पेंच टाईगर रिजर्व एवं इसके आसपास का क्षेत्र रूडियार्ड किपलिंग के प्रसिद्ध “द जंगल बुक” का वास्तविक कथा क्षेत्र है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में मोगली लैंड क्षेत्र तथा वॉटर राफ्टिंग सुविधा है।

बांधवगढ राष्ट्रीय उद्यान, उमरिया

  • यह राष्ट्रीय उद्यान उमरिया जिलों में है | इसका क्षेत्रफल लगभग 448.84 वर्ग किमी है।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान 32 पहाड़ियों से घिरा है | इस उद्यान में एक मुख्य पहाड़ है जो ‘बांधवगढ़’ कहलाता है। बाँधवगढ़ की पहाड़ी पर
  • 2 हजार वर्ष पुराना किला बना है।
  • बांधवगढ राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन्‌ 1968 में की गई थी तथा इसे 1993 में बाघ परियोजना में शामिल किया गया था |
  • यहां बाघों का घनत्व देश में सर्वाधिक (1 बाघ प्रति 8 वर्ग किमी) है।
  • पूर्व बांधवगढ़ के चारों ओर फैले जंगल का रखरखाव रीवा के महाराजा के शिकारगाह के रूप में किया जाता था|
  • इस राष्ट्रीय उद्यान सफेद बाघ के लिए प्रसिद्ध रहा हैं।

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान, पन्‍ना

  • पन्‍ना राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के पन्‍ना एवं छतरपुर में फैला हुआ है।
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 543 वर्ग किमी है |
  • इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन्‌ 1981 में हुई थी तथा इसे 1994 में बाघ परियोजना में शामिल किया गया |
  • केन नदी किस राष्ट्रीय उद्यान के बीच से होकर गुजरती है।
  • पन्‍ना राष्ट्रीय उद्यान में प्रदेश का एकमात्र रेप्टाइल पार्क है, जहां घड़ियाल मगरमच्छ आदि का प्राकृतिक आवास है |
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में जंगली भैंसों की संख्या सर्वाधिक है |
  • पन्‍ना राष्ट्रीय उद्यान को 2011 में जैववमंडल रिजर्व घोषित किया गया है।
  • पन्‍ना राष्ट्रीय उद्यान को ‘विश्व वन्यजीव कोष (WWF)’ से भी सहायता प्राप्त हो रही है।

संजय राष्ट्रीय उद्यान, सीधी

  • यह मध्यप्रदेश के सीधी जिले में है | इस राष्ट्रीय उद्यान का अधिकांश हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य में चला गया है।
  • पूर्व में इसका नाम डुबरी था।
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 467 वर्ग किमी है।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान 1981 में स्थापित किया गया था | भारत सरकार द्वारा 2008 में प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया है।

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, होशंगाबाद

  • यह होशंगाबाद जिले में लगभग 528 वर्ग किमी के क्षेत्र में फेला हुआ है।
  • यह सन्‌ 1983 में स्थापित किया गया था। इसे 1999-2000 में प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया है।
  • प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी धूपगढ़ यहीं स्थित है ।
  • पूरे मध्य भारत में यह एकमात्र टाइगर रिजर्व है जहां पर प्राकृतिक रूप से चलने की आजादी है।

माधव राष्ट्रीय उद्यान, शिवपुरी

  • यह शिवपुरी जिले में है, यह 1958 में स्थापित किया गया था।
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 355 वर्ग किमी है ।
  • इस उद्यान से राष्ट्रीय राजमार्ग 3 आगरा – मुंबई गुजरता है|
  • यहाँ जार्ज कैसल भवन है |
  • यह मूलतः: ग्वालियर महाराजा के लिए शाही शिकार का अभयारण्य था।
  • माधवराव सिंधिया ने वर्ष 1918 में मनिहार नदी पर बांधों का निर्माण करते हुए साख्या सागर और माधव तालाब का निर्माण
  • कराया था।

घुघवा फासिल (जीवाश्म) राष्ट्रीय उद्यान, डिंडोरी

  • यह डिंडोरी जिले में शाहपुरा में है ।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से मध्यप्रदेश का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान हैं इसका क्षेत्रफल लगभग 0.27 वर्ग किमी है |
  • इसकी स्थापना 1968 में की गई थी ।
  • इस उद्यान में पादपों तथा जन्तुओं के जीवाश्म पाए जाते हैं |

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल

  • सन्‌ 1979 में स्थापित यह राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में स्थित है|
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 4.452 वर्ग किमी है।
  • इसे 26 जनवरी 1983 को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया |
  • यह ‘थ्री इन वन’ राष्ट्रीय उद्यान है। नेशनल पार्क के साथ-साथ एक चिड़ियाघर (जू) तथा जंगली जानवरों का रेस्क्‍्यू सेंटर (बचाव केन्द्र) भी है।
  • इसके के बीच में स्नेक पार्क (सर्प उद्यान) भी स्थित है।
  • यह प्रदेश का एकमात्र ऐसा चिड़ियाघर भी है जिसकी देखरेख वन विभाग करता है । अन्य चिड़ियाघरों (इंदौर एवं जबलपुर) का प्रबंधन स्थानीय नगर निगम करते हैं।

डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान, धार

  • यह धार जिले में 2010 में स्थापित किया गया था। इसका क्षेत्रफल लगभग 0.897 है|
  • यह क्षेत्र वर्ष 2011 में डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान बाग के रूप में अधिसूचित किया गया है।
  • यहाँ 6.5 करोड वर्ष पुराने डायनासोर के जीवाश्म (अण्डे) हैं।

कूनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान, श्योपुर

  • यह मध्यप्रदेश के शिवपुर में स्थित है जिसकी स्थापना 1981 में अभ्यारण्य के रूप में की गई थी । 2018 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का
  • दर्जा प्रदान किया गया |
  • इसका कुल क्षेत्रफल 413 वर्ग किमी. है।
  • गुजरात के गिर अभयारण्य के एशियाटिक लॉयन (बब्बर शेर) लाने के लिए म.प्र. सरकार ने कुनो अभयारण्य को नेशनल पार्क घोषित
  • किया हैं।
  • इसे 2009 में चीता के पुनर्स्थापन के लिए भी चिन्हित किया गया है।
  • यह क्षेत्र सहरिया जनजाति का निवास स्थान है।
  • कूनो नदी इस उद्यान से होकर बहती है।

व्हाइट सफारी मुकुंदपुर, सतना

  • विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी मध्य प्रदेश के सतना जिले के मुकुंदपुर में स्थापित की गई है।
  • इसका औपचारिक रूप से लोकार्पण 3 अप्रैल 2016 को किया गया |
  • ऐसे सफारी का नाम महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव के नाम पर महाराजा मार्त॑ड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी रखा गया है |
  • म. प्र. में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत 6 राष्ट्रीय उद्यान हैं।
  1. कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान – 1974 में शामिल
  2. पेंच राष्ट्रीय उद्यान – 1992 में शामिल
  3. बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान – 1993 में शामिल
  4. पन्ना राष्ट्रीय उद्यान – 1994 में शामिल
  5. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान – 1999 – 2000 में शामिल
  6. संजय गांधी डुबरी टाइगर रिज़र्व – 2008 में शामिल
    नोट – रातापानी अभ्यारण को प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल नहीं किया गया है|

जैव मंडलीय आरक्षित क्षेत्र (बायोस्फीयर रिजर्व)

  • बायोस्फीयर रिजर्व एक विशेष पारिस्थितिकी तंत्र या वनस्पति और जीवों का एक विशेष वातावरण होता है, जिसे सुरक्षा और पोषण
  • की आवश्यकता होती है।
  • मध्यप्रदेश में 3 जैवमंडलीय आरक्षित क्षेत्र है, मध्य प्रदेश का प्रथम जैव आरक्षित क्षेत्र पचमढ़ी 1999) है|

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