राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग | National Backward Classes Commission

  1. सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े वर्गों के लिए एक आयोग होगा, जो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के नाम से जाना जाएगा।
  2. संसद द्वारा इस नामित बनाई किसी विधि के उपबंधो के अधीन रहते हुए आयोग के अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा और इस प्रकार नियुक्त किए गए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की सेवा की शर्तें और पदावधी ऐसी होगी, जो राष्ट्रपति नियम द्वारा निर्धारित करें
  3. राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों को नियुक्त करेगा।
  4. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 14 अगस्त 1993 को किया गया तथा 102 वां संविधान संशोधन 2018 के द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक आयोग का दर्जा दिया गया।

आयोग के कार्य

  1. सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े वर्गों के लिए संविधान या अन्य विधि यह सरकार के किसी आदेश का अन्वेषण करें उस पर निगरानी रखें तथा ऐसे रक्षा उपायों के कार्यों का मूल्यांकन करें
  2. सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े वर्गों को उनके अधिकारो और रक्षोंपायो से वंचित करने की शिकायतों की जांच करें।
  3. उन रक्षा उपायों के कार्यों के बारे में प्रतिवर्ष और ऐसे अन्य समय पर जो आयोग ठीक समझे, राष्ट्रपति को प्रतिवेदन दें
  4. ऐसे प्रतिवेदनो में उन उपायों के बारे में जो अन्य रक्षा उपायों के प्रभावपूर्ण कार्यान्वयन के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा किए जाने चाहिए तथा सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक आर्थिक विकास के लिए अन्य उपायों के बारे में सिफारिश करें।
  5. सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण, विकास तथा उन्नयन के संबंध में ऐसे अन्य कृतयों का निर्वहन करें, जो राष्ट्रपति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधो के अधीन रहते हुए नियम द्वारा निर्धारित करें।

पिछड़ा वर्ग आयोग से संबंधित अन्य तथ्य

  1. आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को देगा तथा राष्ट्रपति ऐसे प्रतिवेदन को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगा और उसके साथ संघ से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्यवाही तथा यदि कोई ऐसी सिफारिश अस्वीकृत की गई है, तो अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज्ञापन भी होगा।
  2. ऐसा कोई प्रतिवेदन या उसका कोई भाग किसी ऐसे विषय से संबंधित है, जिसका किसी राज्य सरकार से संबंध है, तो ऐसे प्रतिवेदन की एक प्रति राज्य सरकार को भेजी जाएगी जो उसे राज्य के विधान मंडल के समक्ष रखवाएगी और उसके साथ राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्यवाही तथा यदि कोई ऐसी सिफारिश अस्वीकृत की गई है, तो अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज्ञापन भी होगा|
  3. किसी भी वाद की जांच करते समय आयोग के समक्ष सिविल न्यायालय की शक्तियां होगी।
  4. संघ और प्रत्येक राज्य सरकार सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े वर्गों को प्रभावित करने वाले सभी महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर आयोग से परामर्श करेगी।
  5. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रथम अध्यक्ष न्यायाधीश आरएन प्रसाद थे तथा वर्तमान अध्यक्ष भगवान लाल साहनी है। तथा आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में है।

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