मध्य प्रदेश में मुगल काल साम्राज्य – Mp gk in hindi

  • बाबर (1526-1530 ई.) मुगलवंश का संस्थापक था ।
  • 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहीम लोदी को हराकर दाबर ने मुगल साम्राज्य की नींव डाली. उसने ग्वालियर, चन्देरी व रायसेन पर भी अधिकार कर लिया था ।
  • मन्दसौर के युद्ध में गुजरात के बहादुरशाह जफर को हराकर पश्चिम मध्य प्रदेश पर भी शासन स्थापित किया ।
  • मन्दसौर, उज्जैन, थार, माण्डू उसके अधीन थे ।
  • बाद में शेरशाह ने मालवा पर अपना अधिकार कर शुजात खां को यहाँ का सूबेदार बनाया । शेरशाह की मृत्यु के बाद मालवा स्वतन्त्र हो गया, पर कुछ समय बाद सम्राट अकबर ने बाजबहादुर से मालवा छीन लिया चंदेरी युद्ध (1528 ई.) में चंदेरी के शासक मेदिनी राय को पराजित किया ।
  • हुमायूं (1530-1540, दूसरा कार्यकाल-1555-56) के साथ गुजरात का शासक स्वतंत्र हो गया और मालवा पर अधिकार कर लिया, परन्तु हुमायूँ ने उसे हराकर पुनः मालवा को मुगल शासन के अधीन कर लिया
  • अकबर (1556-1605) ने मालवा के शासक बाजबहादुर को 1561 ई. में हराकर मालवा पर अधिकार किया । अकबर ने बाजबहादुर को अपने दरबार में द्वि-हजारी मनसब प्रदान किया
  • अकबर ने खानदेश जिसकी राजधानी बुरहानपुर थी, के शासक मीरण बहादुर को पराजित कर मुगल सम्राज्य में उसका विलय किया ।
  • अकबर ने 1601 में असीरगढ के किले (बुरहानपुर) को जीता । यह अकबर का अंतिम विजय अभियान था।
  • मालवा के सुल्तानों ने माण्डू में अनेक प्रख्यात् इमारतों का निर्माण कराया ।
  • जिनमें जहाज महल, हिंडोंला महल, रूपमती का महल, जामा मस्जिद और होशंगशाह का मकबरा विशेष उल्लेखनीय है।
  • अकबर ने आसफ खाँ नामक एक सिपहसालार को गौंडवाना पर हमला करने भेजा ।
  • रानी दुर्गावती ने आसफ खाँ से डटकर युद किया, परन्तु रानी दुर्गावती की पराजय हुई
  • इस प्रकार अकबर की साम्राज्यवादी नीतियों के कारण मध्य प्रवेश मुगल साम्राज्य का अंग बना ।
  • इसी समय मराठा शक्ति भी मध्य भारत पर विजय के स्वप्न देख रही थी और उनका सपना कुछ सीमा तक साकार भी हुआ
  • परिणामस्वरूप सिंधिया होल्कर, गायकवाड आदि इस क्षेत्र में प्रभावी होते गए । इनके साथ-साथ कतिपय राजपूत राज्य भी अंग्रेजी साम्राज्य का भाग बनने तक अपनी सत्ता इस प्रदेश में स्थापित किए रहे ।
  • इसके बाद लगभग तीन सौ वर्षों तक हिन्दू और मुसलमान राजाओं में
  • युद्ध चलता रहा कुछ समय तक तुर्क मुस्लिम संस्कृति का प्रभाव राजपूतों पर नहीं पड़ा, किन्तु धीरे-धीरे यह पृथक धाराएँ परस्पर मिल-जुलकर बहने लगीं ।
  • ओरछा, भाण्डेर तथा ललितपुर (उ.र्र.) की मस्जिदें, काल्पी के 84 गुम्बद तथा जटाहरा (टीकमगढ़) का दुर्ग पूर्व मुगल काल के बचे हुए स्मृति चिन्ह है ।
  • राजपूत भवन तथा मन्दिर भी पूर्वकाल की विशुद्ध स्थापत्य कला पर आधारित नहीं थे ।
  • 15 वीं शताब्दी में तोमर राजाओं ने गवालियर को छीनकर दुर्ग का निर्माण कराया । इस समय राजा मानसिंह का राज्य था ।
  • 1370 ई. के लगभग फारुखी वंश की स्थापना मलिक रजा ने की ।
  • यह फिरोजशाह तुगलक का सेवक था ।
  • उसका शासन निमाड् जिले से ताप्ती घाटी तक था ।
  • इस वंश का अन्त सन् 1599 ई. में हुआ, जबकि यहाँ के राजा राजबहादुर शाह अकबर के साथ युद्ध में पराजित हुए
  • इस प्रान्त में प्राचीन सभी राजवंशों के उत्तराधिकारी प्रथम मुगल तथा बाद में मराठा और अंग्रेज हुए ।
  • औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल तख्त चरमरा उठा । यह मराठों की विजय के लिए स्वर्ण अवसर सिद्ध हुआ और उनकी विजय पताका चारों ओर फहराने लगी
  • 15 वीं शताब्दी में होशंगशाह ने माण्डू में एक स्वतन्न राज्य की स्थापना की ।
  • गोंडवंश के अन्तिम राजा नूरसिंह राय का पुत्र मालवा के होशंगशाह के विरुद्ध युद्ध करता हुआ सन् 1433 ई. सें मारा गया तथा उसके साथ ही घंटेला गोंडवंश का अन्त हो गया । होशंगशाह के बाद महमूद शाह ने राज्य की बागडोर अपने हाथ में ली. उसने चित्तौड़ के राणा को हराया और इस विजय के उपलक्य में एक विजय स्तंभ बनवाया ।

बुन्देलखण्ड- मुग़ल संबंध

  • बुंदेला शासक सोहनपान ने खंगारों की शक्ति का दमन कर बुंदेला राज्य की नींव डाली
  • इनकी राजधानी ओरछा थी |
  • वीरसिंह देव का दोस्ताना संबंध मुगल राजकुमार सलीम (अकबर का पुत्र, जहाँगीर) से था । सलीम के कहने पर ही वीरसिंह ने अबुल फजल की हत्या कर दी थी
  • सलीम जब जहांगीर के नाम से मुगल सम्राट बना, तो उसने वीरसिंह देव को ओरछा का नरेश बनाया ।
  • सन् 1612 ई. से रामचन्द्र की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र जुझार सिंह ओरछ की गद्दी पर बैठा
  • विक्रम संवत् 1690 ई. में जुझार सिंह ने गोंड राजा प्रेमशाह को मार डाला और उसका किला चौरागढ़ अपने राज्य में मिला लिया ।
  • जुझार सिंह ने शाहजहाँ के समय विद्रोह कर दिया, फलतः शाहजहाँ ने ओरछा पर आक्रमण कर दिया ।

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