मध्यप्रदेश में खनिज उत्पादन

मध्यप्रदेश में खनिज

मध्यप्रदेश खनिज संसाधनों में प्रचुरता की दृष्टि से राष्ट्र के 8 प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में से एक है।
वर्ष 2017-18 में मुख्य खनिजों का उत्पादन मूल्य ३2141 करोड़ रुपए हुआ था, जो पिछले वित्तीय वर्ष में उत्पादित मुख्य खनिजों के उत्पादन मूल्य ₹1814.5 करोड़ रुपए से 18% अधिक है।
मध्य प्रदेश भारत का चौथा सबसे खनिज समृद्ध प्रदेश है। (प्रथम तीन – 1. पश्चिम बंगाल 2. झारखंड 3. उड़ीसा)
मध्य प्रदेश का खनिज उत्पादन मूल्य एवं राजस्व प्राप्ति में देश दूसरा स्थान है।

हीरा

  • भारत में हीरे का भंडार मध्य प्रदेश (90.18%), आंध्र प्रदेश (5.72%) तथा छत्तीसगढ़ (4.09%) में है लेकिन उत्पादन केवल मध्यप्रदेश में ही किया जाता है।
  • यहाँ पन्‍ना ज़िले में पन्‍ना, सतना ज़िले में मझगाँव तथा हीनोता एवं छतरपुर ज़िले में अंगौर हीरे की प्रसिद्ध खानें हैं ।
  • प्री-कैम्ब्रियन काल की जीवाश्म रहित विन्ध्यन शैलों की नसों में मिलता है।
  • मध्य प्रदेश में ही पन्‍ना ज़िले की किलकिला नदी द्वारा जमा किये गये निक्षेपों में रामखेरिया नामक स्थान पर धरातल के समीप हीरों की प्राप्ति होती है।
  • देश के पहले हीरा संग्रहालय की स्थापना खजुराहो में की जाएगी |
  • मध्य प्रदेश में हीरा का उत्खनन नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा किया जाता है।

तॉँबा

  • तांबा उत्पादन में मध्यप्रदेश का प्रथम स्थान है किंतु भंडारण में राजस्थान व झारखंड के बाद तीसरा स्थान है।
  • मध्यप्रदेश में तांबा प्रमुख रूप से बालाघाट जिले की बैहर तहसील के मलाजखंड, जबलपुर के सलीमनाबाद, होशंगाबाद, नरसिंहपुर तथा सागर में मिलता है।
  • बालाघाट का मलाजखंड तांबे की उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा उत्पन्न किया जाता है।
  • तांबे के देश में मध्यप्रदेश के अलावा झारखंड (सिंहभूमि), राजस्थान (झुंझुनू, अलवर, खेतड़ी) महत्वपूर्ण उत्पादक है।

मेंगनीज़

  • मध्य प्रदेश का मैंगनीज़ के उत्पादन में प्रथम स्थान है जबकि भंडारण में ओडिशा व कर्नाटक के बाद तीसरा स्थान है।
  • मध्यप्रदेश में देश के कुल भंडार का 12% है यह दो प्रमुख क्षेत्र बालाघाट एवं छिंदवाड़ा में पाया जाता है।
  • बालाघाट जिले में भारवेली मैग्नीज की सबसे बड़ी खुले मुंह की खदान है।
  • प्रमुख उत्पादक जिलें – बालाघाट, छिंदवाड़ा, झाबुआ एवं जबलपुर
  • काले रंग की भस्म के रूप में धारवाड़ युग की चद्ठानो में पाया जाता है | इसके प्रमुख अयस्क साइलोमैलीन व ब्रोनाइट है।
  • मैगनीज़ की कुल खपत का 95 % प्रतिशत भाग धातु निर्माण में तथा अधिकांश भाग इस्पात उधोगो में तथा कुछ भाग अन्य मिश्र धातुओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है।
  • मेगनीज और लोहे से मिश्रित कर बनाया गया इस्पात फेरोमैंगनीज कहलाता है ।

बॉक्साइट

  • बॉक्साइट ऐलुमिनियम का अयस्क है।
  • बाक्साइट उत्पादन एवं भण्डारण में मध्यप्रदेश का छटवां स्थान है जबकि बॉक्साइट उत्पादन एवं भंडारण में प्रथम स्थान पर ओड़िसा है।
  • मध्यप्रदेश में बॉक्साइट का उत्पादन कटनी, शहडोल, अनूपपुर, जबलपुर, रीवा, सीधी एवं सतना जिलों में किया जाता है।
  • उत्तरप्रदेश के रेणुकूट एलुमीनियम संयत्र को अनूपपुर के अमरकंटक से बॉक्साइट भेजा जाता है |

लोह अयस्क

  • मध्यप्रदेश में लौह अयस्क के भंडार कम मात्रा में पाए जाते हैं।
  • लौह आमतौर पर मेग्नेटाईट (70-72% लोह अंश), हैमेटाईट (60-70% लोह अंश), लिमोनाईट (35-50% अंश) या सिडेराईट (10-30% लोह अंश) (66०03), के रूप में पाया जाता है|
  • भारत में सर्वाधिक (70%) लौह अयस्क हेमेटाइट प्रकार का पाया जाता है, जिसका सर्वाधिक भंडार ओड़िसा में है।
  • लौह अयस्क के उत्पादन में ओड़ीसा प्रथम तथा कर्नाटक भंडारण में प्रथम स्थान पर है |
  • म.प्र. में जबलपुर, अनूपपुर और बालाघाट में लौह अयस्क प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त विदिशा, उज्जैन, शाजापुर, धार, झाबुआ आदि।

कोयला

  • मध्य प्रदेश का कोयला के उत्पादन में कि छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड के बाद चौथा स्थान है, जबकि भंडारण में मध्य प्रदेश का पांचवा स्थान है।
  • कोयले की गुणवत्ता उसमें उपस्थित कार्बन की मात्रा के आधार पर तय होती है। एंथ्रेसाइट में 80-90% कार्बन, बिटूमिनस में 55-80%
  • कार्बन, लिग्नाइट में 40-55% कार्बन, पीट में 40 से कम कार्बन
  • सोहागपुर (शहडोल) मध्यप्रदेश का सर्वाधिक विस्तृत कोयला क्षेत्र है।
  • मध्य प्रदेश के सिंगरौली में जनवरी, 1976 में कोयले की 136 मीटर मोटी तह मिली, जो विश्व में कोयले की दूसरी सर्वाधिक मोटी परत
  • है।
  • कोयला वितरण की दृष्टि से मध्य प्रदेश मुख्यतः दो भागों में विभक्त है-
  • A. मध्य भारत का कोयला क्षेत्र – इसके अंतर्गत निम्न 5 क्षेत्र है।
  1. उमरिया क्षेत्र (सबसे छोटा कोयला क्षेत्र 15 वर्ग किमी), 2. सोहागपुर क्षेत्र – मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र, 3. सिंगरौली क्षेत्र, 4. कोरार क्षेत्र (उमरिया), 5. जोहिला कोयला क्षेत्र (उमरिया)
    B. सतपुड़ा कोयला क्षेत्र – इसके अंतर्गत निम्न 4 क्षेत्र है ।
  2. मोहपानी क्षेत्र (नरसिंहपुर), 2. शाहपुरा ततवा क्षेत्र (बैतूल- होशंगाबाद), 3. कान्हन घाटी क्षेत्र, 5. पेंच घाटी क्षेत्र

चीनी मिट्टी

  • यह सफेद से राख के रंग की मिट्टी है जो अत्यधिक सुघटय तथा उच्च तापसह है और जलाने पर सिकुड़ती नहीं है| अन्य नाम केओलिन है
  • ग्रेनाइट और फेल्सपार के क्षरण से चीनी मिट्टी का निर्माण होता है।
  • चीनी मिट्टी का उपयोग बर्तन, प्याले, कटोरी, थाली, अस्पताल में काम में लाए जानेवाले सामान, बिजली के पृथक्कारी (इंसुलेटर), मोटरगाड़ियों के स्पार्क प्लग, तापसह ईटें इत्यादि बनाने में होता है।
  • इसके उत्पादन में रीवा प्रथम स्थान पर तथा जबलपुर द्वितीय स्थान पर है। इसके अलावा ग्वालियर में नाकुम पहाड़ी, आन्तरी तथा बैतूल, छतरपुर, सीधी, सतना आदि स्थानों पर भी चीनी मिट्टी पाई जाती है।
  • इनके प्रमुख कारखाने जबलपुर व ग्वालियर में हैं ।

अग्नि मिट्टी (फ़ायर क्ले)

  • अधिकतर कोयले की खानों से प्राप्त होने वाली यह मिट्टी 1600″ फे तक भी नहीं जलती है, इसीलिए इसका उपयोग अँगीठी, भट्ठी तथा चिमनी इत्यादि के भीतर किया जाता हैं |
  • मध्य प्रदेश में गोण्डवाना युग की चट्टानों में इसके निक्षेपण मिलते हैं जबलपुर के दुबार तथा पिपरिया नरसिंहपुर के साली चौका, मानेगाँव, सोनेरी तथा बधाई एवं छिंदवाड़ा के मुरिया नामक स्थान पर अग्नि मिट्टी पाई जाती है।
  • इसका उत्खनन जबलपुर शहडोल तथा पन्‍ना में हो रहा है।

कोरण्डम

  • कोरण्डम एल्युमिनियम का प्राकृतिक ऑक्साइड होता है | हीरे के बाद कोरण्डम ही सबसे कठोर खनिज है ।
  • मध्य प्रदेश में कोरण्डम, पन्‍ना तथा सीधी जिले के पीपरा एवं परकोटा में पाया जाता है|
  • इसका उपयोग समतल शीशे व क्वार्टज की सतह घिसने में होता है।

फेलस्पार

  • फेल्सपार संघटन की दृष्टि से खनिज पोटैशियम, सोडियम, कैल्सियम, तथा बेरियम के ऐलुमिनो सिलिकेट हैं । धरती के गर्भ का लगभग 60% भाग फेल्सपार से बना है।
  • इसके संपूर्ण उत्पादन की दो तिहाई मात्रा कांच तथा चीनी मिट्टी के उद्योगों में काम आती है।
  • उच्च श्रेणी का पोटाश फेल्सपार विद्युत-अवरोधी पदार्थ तथा बनावटी दाँत बनाने के काम आता है।
  • मध्य प्रदेश में यह खनिज जबलपुर और शहडोल में पाया जाता है, छिंदवाड़ा जिले में बोरगाँव तथा बीधीखेरा में भी इसका उत्खनन किया जाता है।

चूना-पत्थर

  • चूना पत्थर (Limestone) एक अवसादी चट्टान है जो, मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3 ) के विभिन्‍न क्रिस्टलीय रूपों जैसे कि खनिज केल्साइट या एरेगोनाइट से मिलकर बनी होती है।
  • चूना पत्थर उत्पादन में मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान है जबकि भंडारण में सातवें स्थान है।
  • मध्यप्रदेश में चूना पत्थर उत्पादन में सतना प्रथम, कटनी (चुना नगरी) द्वितीय, दमोह तृतीय एवं रीवा चतुर्थ स्थान पर है।
  • चूना पत्थर के विशाल भण्डार से ही यह प्रदेश सीमेन्ट उद्योग के लिए अनुकूल माना जाता रहा है |

गेरू

  • गेरू के उत्पादन में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है।
  • गेरू के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र प्रथम सतना, द्वितीय जबलपुर हैं|
  • अन्य – जबलपुर पन्‍ना, सोहावल, नागोद, कोठी तथा सतना जिले की बेहट खान में गेरू का विशाल भण्डार है |
  • गेरू का उपयोग सोने के आभूषणों पर चमक लाने तथा कपड़ा रँगने के विविध प्रकार के रंगों और तैलरंग तैयार करने में होता है |

सेलखड़ी (टाल्क)

  • इसे ‘टाल्क और ‘स्टीएटाइट’ भी कहा जाता है।
  • टाल्कम पाउडर का प्रयोग प्राय: सभी घरों में होता है। इसके अतिरिक्त, यह खनिज कपड़ों से चिकनाई को हटाने में, चीनी मिट्टी के उद्योग में, पोर्सिलित तथा टाइल बनाने के काम में तथा रबर, कागज और रंग के उद्योगों में पूरक के रूप में काम आता है।
  • प्रमुख रूप से यह नर्मदा घाटी से प्राप्त होती है। जबलपुर में भेड़ाघाट एवं कपौड़ प्रमुख प्राप्त स्थान है |

टंग्स्टन

  • टंग्स्टन प्रमुख रूप से बुलफ्राम नामक खनिज से हे के प्राप्त किया जाता है ।
  • इसका उपयोग बिजली के बलों के तंतुओं में होता है | दूसरी धातुओं में मिलाने पर उनकी कठोरता बढ़ जाती है, जिस कारण टंग्स्टन का उपयोग काटने के औजार, शल्यचिकित्सा के यंत्र आदि की मिश्र धातुओं में होता है, क्योंकि ये मिश्रधातुएँ अम्ल, क्षार आदि से प्रभावित नहीं होतीं |
  • टंग्स्टन खनिज मध्य प्रदेश में होशंगाबाद जिले के ‘अगरगाँव’ नामक स्थान से प्राप्त होता है।

सुरमा (एंटीमनी)

  • सुरमा रत्न काले रंग का होता है। सुरमा रत्न का उपयोग नेत्रांजन बनाने में होता है ।
  • सुरमा मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में यह खनिज पाया जाता है।

ग्रेफाइट

  • ग्रेफाइट मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पाया जाता है।
  • ग्रेफाइट का उपयोग पेन्सिल की लीड तथा घड़ियों की कमानी बनाने में होता है।
  • उच्च ताप पर चलने वाली मशीनों में इसको तेल या पानी के साथ मिलाकर स्नेहक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • न्यूक्लियर रियेक्टर में मोडेरेटर के रूप में इसका उपयोग किया जाता है।

अभ्रक

  • अभ्रक के उत्पादन में बालाघाट प्रथण है तथा. बनी, जिलें छिंदवाड़ा मंदसौर एवं अन्य जिलें डा, मंदसौर एवं झाबुआ है
  • यह विद्युत्‌ का कुचालक है अतः इसका प्रयोग विद्युत्‌ उद्योग में अधिक होता है।
  • विद्युत्‌ का कुचालक होने के कारण इसका उपयोग कंडेंसर, कम्यूटेटर, टेलीफोन, डायनेमो आदि के काम में होता है।
  • अभ्रक के छोटे-छोटे टुकड़ों को चिपकाकर माइकानाइट बनाया जाता है।

एस्बेस्टस

  • एस्बेस्टस एक रेशेदार खनिज है जो मैग्निशियम, हर सिलिका एवं जल के मिश्रण से बनता है |
  • एस्बेस्टस के सभी प्रकार के विद्युतरोधक अथवा उष्मारोधक (इंस्यूलेटर) बनाने के काम में लाया जाता है।
  • इनसे अग्निरक्षक परदे, वस्त्र और ऐसी ही अन्य वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
  • भारत में एस्बेस्टस का मुख्य उपयोग एस्बेस्टस युक्त सीमेंट तथा तत्संबंधी वस्तुएँ, जैसे स्लेट, टाईल, पाइप और चादरें बनाने में
  • किया जाता है|
  • मध्य प्रदेश में इसका उत्पादन झाबुआ जिले में होता है।

डोलोमाईट

  • डोलोमाइट के उत्पादन में मध्यप्रदेश का प्रथम स्थान है।
  • जब चूना पत्थर में 10 प्रतिशत से अधिक मैग्नीशियम होता है तो वह डोलोमाइट कहलाता है और जब यह अनुपात 45 प्रतिशत से अधिक हो जाता है तो इसे शुद्ध डोलोमाइट कहते हैं ।
  • इसका उपयोग लोहा साफ करने में किया जाता है।
  • मध्यप्रदेश में झाबुआ में सर्वाधिक डोलोमाइट का उत्पादन किया जाता है अन्य उत्पादक जिले इंदौर, सीधी, ग्वालियर, अलीराजपुर,
  • सतना, छिंदवाड़ा, मंडला, कटनी एवं जबलपुर हैं ।

सीसा

  • सीसा एक अम्ल प्रतिरोधी पदार्थ है, जिसका उपयोग विद्युत केबल, लोहे की चादर में लेपन, पेंट, बैटरी तथा युद्ध उपकरण आदि बनाने में किया जाता है।
  • सीसा भंडारण में मध्य प्रदेश का राजस्थान तथा आंध्र प्रदेश के बाद तीसरा स्थान है |
  • मध्यप्रदेश में सीसा दतिया, शिवपुरी, झाबुआ तथा जबलपुर में पाया जाता है।

रॉक फॉस्फेट

  • रोक फॉस्फेट का सर्वाधिक प्रयोग फास्फेट उर्वरकों के निर्माण में होता है।
  • मध्यप्रदेश में रॉक फास्फेट का सर्वाधिक उत्पादन सागर दूसरे स्थान पर छतरपुर एवं तीसरे स्थान पर झाबुआ से किया जाता है।
  • रॉक फास्फेट के उत्पादन में मध्य प्रदेश का दूसरा स्थान तथा भंडारण में तीसरा स्थान है।

संगमरमर

  • संगमरमर एक कायांतरित शैल है, जो कि चूना है पत्थर के कायांतरण का परिणाम है।
  • यह अधिकतर कैलसाइट का बना होता है, जो कि कैल्शियम कार्बोनेट का स्फटिकीय रूप है।
  • जबलपुर में भेड़ाघाट तथा गवारीघाट, बैतूल, सिवनी तथा छिंदवाड़ा में आर्कियन युग की चट्टानों में संगमरमर के भण्डार मिले हैं।
  • इसके भंडारण में मध्य प्रदेश, राजस्थान के बाद दूसरेक्ष’ स्थान पर है।

स्‍्लेट

  • मध्य प्रदेश सलेट उत्पादन की दृष्टि से भारत में प्रथम स्थान पर है, मध्यप्रदेश में इसका सर्वाधिक उत्पादन मंदसौर में किया जाता है।

यूरेनियम

  • मध्य प्रदेश में बड़ा हलेहरा बक्सवाहा जिला व छतरपुर एवं शहडोल में यूरेनियम के भंडार के, मिले हैं.
  • बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी में ढाई हजार एकड़ क्षेत्र में बहुमूल्य धातु यूरेनियम की मौजूदगी के प्रमाण हवाई सर्वेक्षण में मिले हैं ।

मध्य प्रदेश राज्य खनिज निगम

  • मध्य प्रदेश राज्य खनिज विकास निगम खनिज पदार्थों के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा राज्य खनिज विकास निगम की स्थापना 19 जनवरी 1962 को की गई थी ।
  • इसका मुख्यालय भोपाल में है तथा यह निगम राज्य शासन द्वारा पूर्णतः स्वामित्व प्राप्त कम्पनी है।

खनिज नीति

  • मध्य प्रदेश में सबसे पहले 1995 में खनिज नीति की घोषणा की थी|
  • वर्तमान में लागू मध्यप्रदेश राज्य खनिज नीति-2010 का अनुमोदन 07 सितम्बर 2010 को किया गया था |
  • इस खनिज नीति का मूल उद्देश्य सुनियोजित एवं वैज्ञानिक तरीकों से खनिजों का विकास सुनिश्चित करना है|
  • खनिजों के विकास के लिये समस्त पर्यावरण एवं पारिस्थितिकीय विषयों का ध्यान रखा जायेगा।

मध्यप्रदेश में गौण खनिज की रियासतें उत्खनन पट्टा अथवा व्यापारिक खदान के रूप में मध्य प्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के प्रावधान के अनुसार स्वीकृत/अनुबंधित की जाती है।
मध्यप्रदेश में गोंड खनिजों से प्राप्त होने वाली राजस्व को वित्त विभाग द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को उपलब्ध कराया जाता है, जिसका उपयोग पंचायतों के लिए किया जाता है।

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