बंगाल की प्रमुख राजनीतिक संस्थाएँ

लैंडहोल्डर्स सोसायटी या जमीदारी एसोसिएशन

  • स्थापना :- 1838 में
  • संस्थापक :- द्वारकानाथ टैगोर द्वारा
  • लैंडहोल्डर्स सोसायटी पहली राजनीतिक सभा थी, जिसने संगठित राजनीतिक प्रयासों का शुभारंभ किया। इस संस्था ने ज़मींदारों के हितों की सुरक्षा तथा उनकी शिकायतों को दूर करने के लिये संवैधानिक उपचारों का प्रयोग किया।
  • कलकत्ता के ज़मींदारों की यह सभा इंग्लैंड की “ब्रिटिश इंडिया सोसायटी’ को भी सहयोग करती थी, जिसकी स्थापना विलियम एडम्स द्वारा की गई थी।
  • लैंडहोल्डर्स सोसायटी के प्रमुख भारतीय नेता द्वारकानाथ टैगोर, राधाकांत देव, प्रसन्न कुमार ठाकुर आदि ज़मींदार थे। इसलिये इसे ‘ज़मींदारी एसोसिएशन’ भी कहा जाता है।

बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसायटी

  • स्थापना :- 1843 में
  • संस्थापक :- जॉर्ज थॉमसन की अध्यक्षता में
  • यह भारतीय तथा गैर सरकारी अंग्रेजों का सम्मिलित संगठन था।
  • इस सभा का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजी शासन में भारतीयों की वास्तविक अवस्था के विषय में जानकारी प्राप्त कर उनका प्रचार-प्रसार करना तथा जनता की उन्नति व न्यायपूर्ण अधिकारों के लिये शांतिमय और कानूनी साधनों का प्रयोग करना था।

ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन

  • स्थापना :- अक्तूबर  1851 में
  • संस्थापक :- राधाकांत देव
  • ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की स्थापना कलकत्ता में राधाकांत देव की अध्यक्षता में की गई। इसके अन्य प्रमुख सदस्यों में देवेंद्रनाथ टैगोर, रामगोपाल घोष, प्यारी चंद्र मित्र, कृष्णदास पाल आदि थे।
  • पूर्ववर्ती दोनों प्रमुख संस्थाओं (लैंडहोल्डर्स सोसायटी एवं बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसायटी) की असफलताओं के कारण इन दोनों को मिलाकर ‘ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन’ का गठन किया गया।
  • यह संस्था भूमिपतियों के हितों के लिये मुख्य रूप से कार्यरत थी। इसी के प्रयासों से 1853 में चार्टर के नवीकरण के समय ब्रिटिश संसद को प्रार्थना पत्र भेजा गया था। इस प्रार्थना पत्र में एक लोकप्रिय विधानसभा, न्यायिक एवं दंडनायक कार्य पृथक् किये जाने, अधिकारियों के वेतन कम किये जाने तथा नमक, आबकारी व स्टांप कर को समाप्त किये जाने आदि की मांग की गई।
  • इसके परिणामस्वरूप 1853 के चार्टर एक्ट में गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में 6 नए सदस्यों को कानून बनाने के लिये जोड़ लिया गया।
  • इस संगठन ने नील विद्रोह की जाँच हेतु आयोग बैठाने की मांग की थी।
  • ‘हिंदू पैट्रियट’ इस संस्था का मुख्य पत्र था।

इंडियन लीग

  • स्थापना :- 25 सितंबर, 1875
  • संस्थापक :- शिशिर कुमार घोष
  • इसके अस्थायी अध्यक्ष शंभू चंद्र मुखर्जी थे।
  • इस संस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों में राष्ट्रवाद की भावना का विकास कर राजनीतिक शिक्षा को प्रोत्साहन देना था।

इंडियन एसोसिएशन (भारत संघ)

  • स्थापना :- 26 जुलाई, 1876
  • संस्थापक :- सुरेंद्रनाथ बनर्जी तथा आनंद मोहन बोस
  • सुरेंद्रनाथ बनर्जी तथा आनंद मोहन बोस के सहयोग से कलकत्ता के अल्बर्ट हॉल में इसकी स्थापना की। सुरेंद्रनाथ बनर्जी इसके संस्थापक तथा आनंद मोहन बोस इसके सचिव थे। सुरेंद्रनाथ बनर्जी को ‘राष्ट्र गुरु’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • इंडियन एसोसिएशन की स्थापना, इंडियन लीग के स्थान पर की गई थी।
  • इसका उद्देश्य मध्यम वर्ग के साथ-साथ साधारण वर्ग को भी इसमें सम्मिलित करना था, इस कारण इसका चंदा पाँच रुपये वार्षिक रखा गया।
  • इस एसोसिएशन में जमींदारों की जगह मध्यम वर्ग को प्राथमिकता दी गई।
  • इस संगठन मे सिविल सर्विसेज आंदोलन चलाया, जिसे ‘भारतीय जनपद सेवा आंदोलन’ (सिविल सर्विस मूवमेंट) भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट, आर्स एक्ट तथा इल्बर्ट बिल के विरोध में आंदोलन चलाया गाया।
  • 1883 में सुरेंद्रनाथ बनर्जी को अपने पत्र ‘बंगाली’ में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश जे.एफ. नॉरिस की आलोचना करने के कारण 2 माह की सजा हुई।
  • इंडियन एसोसिएशन ने दिसंबर 1883 में कलकत्ता के अल्बर्ट हॉल में आनंद मोहन बोस की अध्यक्षता में पहली इंडियन नेशनल कॉफ्रेंस का आयोजन किया। दूसरी इंडियन नेशनल कॉफ्रेंस कलकत्ता में दिसंबर 1885 में हुई। इसकी अध्यक्षता सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने की थी। 1886 में इसका विलय भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस में हो गया।

कलकत्ता स्टूडेंट्स एसोसिएशन

  • स्थापना :- 1875 में
  • संस्थापक :- आनंद मोहन बोस
  • आनंद मोहन बोस के साथ सुरेंद्रनाथ बनर्जी भी छात्रों के इस संगठन में शामिल हुए। कालांतर में सुरेंद्रनाथ बनर्जी छात्रों के बड़े नेता बनकर उभरे।

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