मध्यप्रदेश के लोकनाट्य | Folk Drama of madhya pradesh

लोक नाट्य (Folk Drama)

मध्य प्रदेश में लोक नाट्य का विशेष स्थान हैं जो समाज की जिजीविषा, संकल्पना, भावना, संवेदना तथा ऐतिहासिकताको अभिव्यक्त करती है। नाट्य अपने आप में संपूर्ण विधा है, जिसमें संवाद, कविता, अभिनय संगीत इत्यादि एक साथ उपस्थित रहते हैं।

माच

  • मालवा क्षेत्र के प्रसिद्ध लोकनाट्य माच को मध्य प्रदेश सरकार ने अपना राजकीय नाट्य घोषित किया है।
  • माच की जन्मभूमि उज्जयिनी ‘उज्जैन’ और इसका मूल प्रसार क्षेत्र मालवा को माना जाता है।
  • माच की शुरुआत रात्रि के प्रथम प्रहर से होती है।
  • इसमें मालवी लोक जन-जीवन के विभिन्न चरित्रों और कृष्ण की लीलाओं का अभिनय किया जाता है। इसमें मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक एवं सारंगी होते हैं। इस शैली में लोकरंग की प्रधानता होती है।

गम्मत

  • यह निमाड़ क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक लोक नाट्य है।
  • गम्मत प्राय: तीन अवसर में विशेष रूप से की जाती है। यह नवरात्रि, होली एवं गणगौर के पर्व पर किया जाता है।
  • यह लोगों के मनोरंजन का साधन ही नहीं, बल्कि सबके सामने अपने मन की बात कहने का भी बड़ा माध्यम है
  • गम्मत का आधार पारंपरिक लोक समाज और उसका जनजीवन है।
  • इस में प्रमुख वाद्य यंत्र मृदंग और झाँझ होते हैं।
  • गम्मत में स्त्री पात्र की भूमिका प्राय: पुरुष ही निभाते हैं।

खम्ब स्वांग

  • कोरकू आदिवासी द्वारा खंडवा, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा क्षेत्रों में किया जाता है।
  • यह क्वार माह की नवरात्रि से प्रारंभ होकर दीपावली के बाद देवउठनी एकादशी तक मेघनाथ की स्मृति में किया जाता है।
  • इसमें लोक जन-जीवन के विभिन्न प्रसंगों पर कटाक्ष किया जाता है जिसमें हास्य-परिहास के साथ सामाजिक विंसगतियों पर प्रहार किया जाता है।

रहस (रासलीला)

  • भादों में कृष्ण जन्माष्टमी के आस पास निमाड़ के गाँवों में कृष्ण लीला के विभिन्न प्रसंगों की प्रस्तुति रासलीला के माध्यम से जाती है।
  • गीत, नृत्य और संगीत का समन्वय रासलीला में प्रमुख रूप से होते है।

छाहुर

  • छाहुर बघेलखंड क्षेत्र का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोक नाट्य है।
  • दीपावली के पर्व से लेकर गोप अष्टमी तक अहीर, तेली और कुम्हार जाति के लोग छाहुर नाट्य आयोजित करते हैं।
  • बघेलखंड की सामंती व्यवस्था के शोषण और कृषक जीवन के कर्तव्य संघर्ष छाहुर लोक नाट्य का विषय होता है।
  • छाहुर मुख्य रूप से मौखिक शैली का लोकनाट्य है।

मनसुखा

  • मनसुखा लोकनाट्य एक लोक प्रहसन है जिसे रास का बघेली रूपांतर माना जाता है।
  • प्रत्येक त्यौहारों एवं उत्सवों के अवसर पर किया जाता है।
  • इसमें मनसुखा कहे जाने वाले विदूषक और गोपियों में नोंक-झोंक होती रहती है।
  • आज भी मसखरों या विदूषकों को गाँवों में मनसुख व लाल कहने का प्रचलन हैं।

हिंगोला

  • हिंगोला एक मंच रहित सीधा और सरल नाट्य रूप है, जो बघेलखंड क्षेत्र में होती है।
  • सभी प्रमुख त्यौहारों और उत्सवों पर हिंगोला किया जाता है।
  • इसमें हास्य एवं कटाक्ष से युक्त दो दलों के बीच में गीतों के माध्यम से नोक-झोंक होती है।
  • इस लोकनाट्य में नट-नटी के अतिरिक्त दर्शक भी भाग लेते हैं।

जिन्दबा (बहलोल)

  • यह मूलत: महिला नाट्य है जिसका अनुष्ठान ‘बसी के दिन’ विवाह के अवसर पर होता है।
  • यह स्त्रियों द्वारा विभिन्न अवसरों पर हास-परिहास के साथ अभिनय और गायन सहित किया जाता है।
  • पुरुषों के नाटक देखने पर उन्हें झाडू एवं मूसलों की मार पड़ती है।

भवाई

  • मध्य प्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर जिले में आदिवासियों द्वारा खुशी के अवसर पर मनाया जाता है।
  • इसमें अभिनय शुरु होने के पहले गणपति और अंबा की स्तुति होती है उसके बाद समाज से जुड़े प्रसंगों पर पुरुष कलाकारोके द्वारा अश्लीलता पूर्ण अभिनय किया जाता है।

बुंदेली नौटंकी

  • यह बुंदेलखंड क्षेत्र का सुप्रसिद्ध लोक नाट्य है। लोक नाट्य की यह प्राचीन शैली धीरे-धीरे विकारग्रस्त होने लगी है। नौटंकी में प्रहलाद, ध्रुव, मोरध्वज, पुरन भगत जैसे आदर्श पौराणिक चरित्र लिये जाते थे।

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