मध्य प्रदेश के प्रमुख राजवंश | होल्कर वंश

  • मुगल साम्राज्य के पतन के पश्चात् मालवा 18 वीं शताब्दी में मराठों की शिकार भूमि बन गया ।
  • होल्कर जब तक मालवा प्रान्त पर अपना आधिपत्य जमाने में सफल़ नहीं हुए, वे मालवा पर बार-बार आक्रमण करते रहे ।
  • सन् 1727 में मल्हार राव होल्कर को सूबे के पाँच महलों की पहली सनद प्राप्त हुई
  • 16 सितम्बर, 1729 को होल्कर और पंवार की सनदों की पुष्टि की गई
  • 3 अक्टूबर, 1730 को होल्कर मालवा का सर्वोच्च शासक नियुक्त किया गया ।
  • 2 नवम्बर, 1731 को पेशवा ने मालवा का शासन होल्कर और सिंधिया को सौंप दिया
  • पेशवा बाजीराव ने 29 जुलाई, 1732 के एक औपचारिक दस्तावेज द्वारा सिंधिया होल्कर और तीन पंवार सरदारों के वीच मालवा के जिलों का विभाजन कर दिया
  • इन प्रदेशों में इन्दौर, देपालपुर और बेटमा सहित साढ़े अठुाईस परगने शामिल थे ।
  • इस बन्दोबस्त द्वारा मालवा में मराठा राज्यों की र्नीव पड़ी जो होल्कर (इन्दौर), सिंधिया (ग्वायिर), आनन्दराव पंवार (थार), तुकोजी (देवास बड़ी पांती) तथा जीवाजी (देवास छोटी पांती) द्वारा शामिल थे
  • 14 जनवरी, 1761 को पानीपत के युद्ध में मराठा सेना अब्दाली द्वारा बुरी तरह पराजित हुई
  • पानीपत के युद्ध के पश्चात् राव होल्कर मालवा में अपना आधिपत्य पुनः स्थापित करने के लिए इन्दौर पहुँचा तथा अपनी स्थिति सुढृढ़ की ।
  • अब वह एक ऐसे विशाल क्षेत्र का अधिपति हो गया, जिसकी वार्षिक आय 60 लाख रुपये थी ।
  • 26 मई, 1766 को आलमपुर में राव होल्कर की अचानक मृत्यु हो गई
  • उसके पश्चात खाण्डेराव का पुत्र मालेराव होल्कर के सिंहासनारूढ़ होने के एक वर्ष पश्चात् ही 27 मार्च, 1767 को उसकी मृत्यु हो गई़
  • उसके पश्चात् उसकी माता अहिल्याबाई ने स्वयं राज्य की बागडोर सम्भाली और मल्हारराव के एक विश्वासपात्र अधिकारी तुकोजी राव होल्कर को अपनी सेना का सेनापति बनाया ।
  • अहिल्याबाई ने शासन की बागडोर अपने हाथों में सम्भाली
  • तुकोजीराव होल्कर ने सेना का सेनापतित्व ग्रहण किया.
  • अपनी उपकारिणी अहिल्याबाई के प्रति आभार क्षणभर के लिए भी नहीं भूला तथा संदैवे महत्वपूर्ण विषयों पर उसको परामर्श देता रहा
  • 13 अगस्त, 1795 को 70 वर्ष की आयु में अहिल्याबाई की मृत्यु हो गई उसने होल्कर परिवार द्वारा अधिकृत क्षेत्रों पर विलक्षण दक्षता और कुशलतापूर्वक 30 वर्षों तक शासन किया
  • तुकोजी ने प्रशासन कार्य सम्भाला, किन्तु कुछ समय पश्चात् 15 अगस्त, 1797 को पूना में उनकी मृत्यु हो गई
  • होल्कर वंश के शासकों में काशीराव, यशवन्तराव प्रथम तुलसीबाई ने (मल्हारराव के नाम से) शासन की बागडोर सम्भाली
  • होल्करों ने इन्दौर में लगभग दो शताब्दी तक राज्य किया
  • अन्तिम होल्कर शासक तुकोजी तृतीय ने इस राज्य को भारत संघ में विलय कर दिया

इंदौर का होल्कर वंश –

मल्हारराव होल्कर1730-1766 ई.
मालेराव होल्कर1766-1767 ई.
अहिल्याबाई होल्कर1767-1795 ई.
तुकोजीराव होल्कर1795-1797 ई.
यशवंतराव होल्कर1798-1811 ई.
मल्हारराव होल्कर तृतीय1811-1833 ई.
तुकोजीराव होल्कर द्वितीय1844-1886 ई.
यशवंतराव होल्कर द्वितीय1926-1948 ई.

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