मध्य प्रदेश के प्रमुख राजवंश | गुप्त वंश

गुप्तकाल

  • गुप्त वंश का संस्थापक श्रीगुप्त था ।
  • हरिषेण के प्रयाग अभिलेख से विदित होता है कि समुद्रगुप्त ने तत्कालीन विदिशा शासक श्रीधर को पराजित करके विदिशा पर अधिकार कर लिया था
  • समुद्गुप्त ने शकों को पश्चिमी मध्य प्रदेश में हराया ।
  • गुप्तकाल के सिक्के सिंह तथा गरुड प्रकार के हैं, जिन पर गुप्तलिपि में रामगुप्त का नाम लिखा मिलता है ।
  • कुछ सिक्कों पर गुप्त शासन चिन्ह (चिह्र) ‘गरुड़ ध्वज’ भी बना मिलता है
  • स्कंदगुप्त कुमारगुप्त प्रथम का उत्तराधिकारी था
  • मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सुपिया नामक स्थान से प्राप्त स्मारक स्तम्भ लेख तथा दमोह जिले के सकोर नामक स्थान से प्राप्त सोने के सिक्कों से स्कंदगुप्त के मालवा, विन्ध्य प्रदेश तथा महाकौशल क्षेत्र पर अधिकार का पता चलता है ।
  • स्कंदगुप्त के पश्चात् गुप्त वंश में कोई प्रतापी सम्राट नहीं हुआ । अंतिम नरेश विष्णुगुप्त हुए
  • भानुगुप्त के एरण अभिलेख (510 ई.) से ज्ञात होता है, कि उसका अधिकारी गोपराज एरण के युद्ध में मारा गया था, जिसने आक्रमण कर इस प्रदेश को जीत लिया
  • प्रारम्भिक गुप्त सम्राटों में चन्द्रगुप्त प्रथम का सम्भवतः कुछ भाग मध्य प्रदेश का, जो इलाहाबाद से लगा है, उसके साम्राज्य में रहा होगा
  • चन्द्रगुप्त प्रथम के पश्चात् उत्तराधिकारी उसके पुत्र समुद्रगुप्त ने अपने साम्राज्य की सीमाएँ फैलाने का प्रयत्न किया
  • इलाहाबाद प्रशस्ति में समुद्रगुप्त की दक्षिणापथ विजय का वर्णन है। वर्णन् के अनुसार कोसल (अर्थात् दक्षिण कोसल) के राजा महेन्द्र को महाकान्तर (आधुनिक बस्तर तथा सिहांवा के जंगली प्रदेश) के राजा व्याघ्रराज को केरल में मण्टराज, पिष्टपुर के महेन्द्रगिर, कोटटुर के स्वामिदत्त, एरण्डपल्ल के दमन, काँची के विष्णुगोप, अवमुक्त के नीलराज, वेंगी के हस्तिवर्मन, पालक्म के राजा उग्रसेन, देवराष्ट्र के कुबेर तथा कुस्थल के राजा धनंजय को पराजित कर सिंहासन च्युत कर दिया ।
  • इस अभियान में समुद्र गुप्त मध्य प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी भाग से होता हुआ उड़ीसा में पहुँचा
  • इसके पश्चात् इलाहाबाद में आर्यावर्त के नौ राजाओं को अपने राज्य में मिलाया, उनमें गणपति नाग तथा नागसेन मध्य भारत के नाग वंश से सम्बन्धित थे ।
  • कुछ गणराज्यों ने भी समुद्र गुप्त की अधीनता स्वीकार की थी। ये गणराज्य मालव, अर्जुनायन, यौधेय, मद्रक, अभीर, प्रार्जुन, सनकानिक, काक और खरपरिक थे ।
  • इनमें से कुछ गणराज्य मध्य प्रदेश से सम्बन्धित थे । अभीरों की एक बस्ती मध्य प्रदेश में भी थी, जिसे उनके नाम पर आज भी अहिरवारा कहा जाता है ।
  • यह स्थान विदिशा और झाँसी के बीच में है, यह स्थान सम्भवतः वही प्रदेश है, जिसका कि प्रयाग प्रशस्ति में उल्लेख है ।
  • सनकानिक विदिशा के पास-पड़ोस में ही कहीं बसे होंगे ।
  • इसी प्रकार खरपरिकों को दमोह जिले में रखा गया ।
  • समुद्र गुप्त के एरण से प्राप्त अभिलेख में एरण उसके समय में ‘स्वभोग नगर” था ।
  • इस तरह से समुद्र गुप्त ने मध्य प्रदेश के अधिकांश भाग तथा नर्मदा की उत्तरी सीमा तक अपना राज्य स्थापित कर लिया था
  • इसकी पुष्टि बमनाला तथा सकोर से प्राप्त समुद्रमुप्त के सिक्कों से होती है ।
  • गुप्त इतिहास में एक कांय नामक शासक के सिक्के विदिशा तथा सकौर से प्राप्त हुए हैं।
  • इतिहासकार यह मानने लगे हैं कि समुद्र गुप्त का उत्तराधिकारी रामगुप्त हुआ, जो चन्द्रगुप्त द्वितीय का भाई था
  • तथ्य की पुष्टि स्वरूप विशाखा दत्त कृत-देवीचन्द्र गुप्तम’ नाटक तथा मध्य प्रदेश के विदिशा तथा ऐरण से रामगुप्त के सिक्के मिले हैं।
  • साहित्यिक उल्लेखनुसार शकों द्वारा पराजित होकर रामगुप्त ने अपनी पत्नी ध्रुतदेवी को एक राजा के हाथों सौंपना स्वीकार कर लिया था, किन्तु उसके छोटे भाई चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शक राजा की हत्या के बाद रामगुप्त की हत्या कर उसकी विधवा पत्नी से शादी कर साम्राज्य का अधिकारी हो गया
  • इन सिक्कों से ऐसा प्रतीत होता है कि रामगुप्त का विदिशा तथा ऐरण से सम्बन्ध रहा होगा
  • रामगुप्त के पश्चात् चन्द्रगुप्त द्वितीय 366-67 ई. के लगभग मगध के राज सिंहासन पर बैठा ।
  • चन्द्रगुप्त द्वितीय द्वारा विदिशा क्षेत्र में किए गए अभियान का पता उदयगिरि गुफा लेख से चलता है ।
  • विदिशा के निकट साँची के स्तूप से प्राप्त अभिलेख में आम्रकार्दव द्वारा काकनादबोट (साँची) के महाविहार के आर्य संघ को दान देने का उल्लेख है।
  • पूर्वीमालवा में चन्द्रगुप्त द्वितीय के एक मन्त्री, एक सामन्त तथा एक सैनिक अधिकारी की उपस्थिति उसके दीर्घकालीन अभियान की ओर संकेत करती है।
  • मालवा क्षेत्र के अतिरिक्त पटअन, बमनासा, सकौर, सिवनी, सिहोर तथा हरदा से भी सिके मिले है, इससे उनके मध्य प्रदेश में साम्राज्य के विस्तार का पता चलता है ।
  • चन्द्रगुप्त द्वितीय का उत्तराधिकारी कुमार गुप्त प्रथम 415 ई. के लगभग मगध के राज सिंहासन पर बैठा ।
  • उसके अभिलेखों से मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में कुछ राज्यपाल और सामन्तों का पता चलता है ।
  • गुना जिले के तैमुन शिलालेख से तुम्बवन के शासक घटोत्कक्षगुप्त मन्दसौर से प्राप्त अभिलेख में दशपुर (मंदसौर) में सेनापति बन्धु शर्मा का शासन करने का उल्लेख है ।
  • कुमार गुप्त के कुछ सिकके पूर्व-निमाड जिले के वमनाला में हैं।
  • इन सिक्कों से भी मथ्य प्रदेश में उनके साम्राज्य विस्तार का पता चला है।

bihar gk bihar gk in hindi bihar si biharssc Bpsc climate of bihar Mp constable Mpgk Mp gk in hindi MpgkMCQ Mpmcq Mppsc Mppsc Pre 2020 Paper Mpps previous year paper Mpsi कवि कवि और उनकी प्रमुख रचनाएँ कालिदास बघेल राजवंश मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश के प्रमुख राजवंश लेखक सामान्य ज्ञान सुभद्रा कुमारी चौहान

Leave a Comment