मध्य प्रदेश राज्य सुचना आयोग For MPPSC

राज्य सूचना आयोग का गठन

  1. प्रत्येक राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा राज्य सूचना आयोग का गठन करेगी जो ऐसी शक्ति का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो उसे इस अधिनियम के अधीन सौंपे जाए।
  2. राज्य सूचना आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा –
    A. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त
    B. ऐसे सूचना आयुक्त जिनकी संख्या 10 से अधिक नहीं होगी और आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किए जाएंगे।
    राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा निम्नलिखित से मिलकर बनी किसी समिति की सिफारिश पर की जाएगी –
    A. मुख्यमंत्री जो समिति का अध्यक्ष होगा
    B. विधानसभा में विपक्ष का नेता
    c. मुख्यमंत्री द्वारा नाम निर्देशित किया जाने वाला मंत्री मंडल का सदस्य
  • यदि विधानसभा में विपक्षी दल का नेता नहीं है तो विधानसभा में सबसे बड़े दल का नेता विपक्षी दल का नेता समझा जाएगा।
  • राज्य सूचना आयोग के कार्यों का साधारण अधीक्षण, निर्देशन और प्रबंधन राज्य मुख्य सूचना आयुक्त में निहित होगा, जिसकी राज्य सूचना आयुक्त द्वारा सहायता की जाएगी और वहां सभी ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा और सभी ऐसे कार्य और बातें कर सकेगा जो राज्य सूचना आयोग द्वारा इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य प्राधिकारी के निर्देशों के अधीन रहे बिना स्वतंत्र रूप से प्रयोग की जा सकती है
  • राज्य मुख्य सूचना आयुक्त राज्य सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंध, पत्रकारिता, जनसंपर्क माध्यम पिया प्रशासन और शासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव वाले समाज में प्रख्यात व्यक्ति होंगे।
  • राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त, यथास्थिति, संसद का सदस्य या किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र का नहीं होगा या अन्य लाभ का पद धारण नहीं करेगा या किसी राजनीतिक दल से संबंधित नहीं होगा या कोई कारोबार नहीं करेगा या कोई व्रत्ती
  • नहीं करेगा।
  • राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय राज्य में ऐसे स्थान पर होगा, जिसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्धारित करें तथा राज्य सूचना आयोग राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से राज्य में अन्य स्थानों पर अपना कार्यालय स्थापित कर सकेगा।

पदावधी और सेवा की शर्तें

  1. सूचना का अधिकार संशोधन अधिनियम 2019 के अनुसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य सूचना आयुक्तों का कार्यकाल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
  2. आयुक्त के रूप में नियुक्ति को छोड़कर के पुनः नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। परंतु यह और कि जहां राज्य सूचना आयुक्त की राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति की जा सकती है।
  3. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त अपना पद ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल या यह राज्यपाल द्वारा इस हेतु नामित किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष पहली अनुसूची में वर्णित प्रारूप के अनुसार शपथ लेगा या प्रतिज्ञा करेगा।
  4. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त किसी भी समय राज्यपाल को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने पद का त्याग कर सकेगा।
  5. संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य निर्बंधन और शर्तें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।
    मूल कानून में प्रावधान था कि मुख्य सूचना आयुक्त तथा अन्य सूचना आयुक्त होते समय उम्मीदवार किसी अन्य सरकारी नौकरी की पेंशन या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करता है तो उस लाभ के बराबर राशि को उसके वेतन से हटा दिया जाएगा, लेकिन नए संशोधन में इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
  6. राज्य सरकार, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों को उतने अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने इस अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हो तथा नियुक्त किए गए अधिकारी एवं कर्मचारियों के वेतन और भत्ते वही होंगे जो इस अधिनियम के तहत निर्धारित किए जाए।

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त राज्य सूचना आयुक्त को हटाया जाना

  1. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त किसी राज्य सूचना आयुक्त को राज्यपाल के आदेश द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से तभी हटाया जाएगा, जब उच्चतम न्यायालय ने राज्यपाल द्वारा उसे किए गए किसी निर्देश पर जांच के पश्चात यह रिपोर्ट दे दी हो कि यथास्थिति राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त को इस आधार पर हटा दिया जाना चाहिए।
  2. राज्यपाल उस राज्य मुख्य सूचना आयुक्त राज्य सूचना आयुक्त को जिसके अधि उच्चतम न्यायालय को निर्देश किया गया है ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट की प्राप्ति पर राज्यपाल द्वारा आदेश पारित किए जाने तक पद से निलंबित कर सकेगा और यदि आवश्यक समझे तो ऐसी जांच के दौरान कार्यालय में उपस्थित होने से मना भी कर सकेगा।
  3. उपयुक्त आधारों के बाद भी राज्यपाल निम्न आधारों पर राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त को उसके पद से हटा सकेगा।
    A. दिवालिया या न्याय निर्णित किया गया हो
    B. वहां ऐसे किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो जिसमें राज्यपाल की राय में नैतिक अधमता शामिल हो।
    C. वहां अपनी पदावधी के दौरान अपने पद के कर्तव्यों से परे कहीं और से वेतन प्राप्त करने में लगा हो।
    D. राज्यपाल की राय में मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण पद पर बने रहने के अयोग्य है।
    E. उसने ऐसे वित्तीय या अन्य हित अर्जित किए हैं जिनसे राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो।
  4. यदि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त यह कोई राज्य सूचना आयुक्त, किसी प्रकार राज्य सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा या करार से संबंधित है या उसमें हितबद्ध या किसी निगमित कंपनी के किसी सदस्य को किसी रूप में से अन्यथा और उसके अन्य सदस्यों के साथ सामान्यता उसके लाभ में या उससे प्राप्त होने वाले किसी फायदे या उपलब्धियों में हिस्सा लेता है तो वहां किसी प्रकार के कदाचार का दोषी नहीं समझा जाएगा।

मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग से संबंधित अन्य तथ्य

  1. मध्य प्रदेश सूचना आयोग का गठन को किया गया।
  2. मध्य प्रदेश सूचना आयुक्त के प्रथम मुख्य सचिव टी.एन श्रीवास्तव थे। तथा मध्य प्रदेश सूचना आयोग का मुख्यालय भोपाल में है।

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