मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग | Madhya Pradesh State Backward Classes Commission

भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 1990 में इंदिरा साहनी तथा अन्य विरूद्ध भारत का संघ, में दिए गए निर्देश के पालन में मध्यप्रदेश शासन द्वारा 13 मार्च 1993 को राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया।

पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन

राज्य सरकार, एक निकाय का गठन करेगी जो मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के नाम से जाना जाएगा यह आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा।

  1. तीन अशासकीय सदस्य जो पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों में विशेष ज्ञान रखते हैं जिनमें से एक अध्यक्ष होगा जिन्हें राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा|परंतु सदस्यों में से कम से कम एक सदस्य पिछड़े वर्गों में से होगा।
  2. संचालक पिछड़ा वर्ग कल्याण मध्यप्रदेश
  3. आयोग का प्रत्येक अशासकीय सदस्य, उस तारीख से, जिसको कि वह अपना पद ग्रहण करता है 3 वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा।
  4. अध्यक्ष या सदस्य किसी भी समय राज्य सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित अपना पद त्याग सकेगा।
  5. राज्य सरकार अक्षमता एवं अन्य आधारों पर किसी भी व्यक्ति को उसके पद से हटा सकेगी

मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के मुख्य कार्य -राज्य की पिछड़ा वर्ग की सूची में जातियों को जोड़ने / विलोपित करने की अनुशंसा करना, पिछड़े वर्ग के लिए संचालित कार्यक्रमों / योजनाओं की मॉनिटरिंग करना, क्रीमीलेयर की सीमा के सम्बन्ध में अनुशंसा करना, लोक सेवाओं एवं शैक्षणिक संस्थाओ में आरक्षण के सम्बन्ध में सलाह देना, पिछड़े वर्गों के संरक्षण के लिए हितप्रहरी के रूप में कार्य करना.

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग से संबंधित अन्य तथ्य

  1. राज्य सरकार आयोग का एक सचिव नियुक्त करेगी तथा आयोग के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यवस्था करेगी जो आयोग के दक्षता पूर्ण कार्यो के संचालन करने के लिए आवश्यक है।
  2. आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन और भत्ते तथा सेवा और शर्ते वही होगी जो विहित किए जाए।
  3. राज्य सरकार विधानसभा द्वारा नामित विधि द्वारा किए गए सम्यक विनियोग के पश्ञात आयोग को अनुदान के रूप में एक निश्थित धनराशि प्रदान करेगी जो आयोग के द्वारा प्रयोग में लाई जाएगी तथा आयोग के द्वारा खर्च किए गए पैसे की जांच महालेखाकार मध्यप्रदेश के द्वारा की जाएगी।

Leave a Comment