मध्य प्रदेश के प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान | Major awards and honors of Madhya Pradesh

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मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने कला के विकास, साहित्य के क्षेत्र में दीर्घ साधना, उत्कृष्टता एवं श्रेष्ठ उपलब्धि हासिल करने वाली विभूतियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित करने तथा इनमें राष्ट्रीय मापदण्ड विकसित करने के लिये राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मानों की घोषणा की है, जो प्रत्येक वर्ष प्रदान किये जाते हैं।

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राष्ट्रीय सम्मान (National Honours )

अखिल भारतीय पुरस्कार/सम्मान

राष्ट्रीय कबीर सम्मान

भारतीय काव्य के क्षेत्र में काव्य प्रतिभा का सम्मान करने के लिये वर्ष 1986-87 में यह सम्मान स्थापित किया गया।
महान संत व कवि कबीर ने सदियों पहले कविता का पुनराविष्कार किया था और उसे नई निर्भीकता दी थी।
इस सम्मान के तहत तीन लाख रुपए की राशि और सम्मान पट्टिका भेंट की जाती है।
अब तक कन्नड, बांग्ला, पंजाबी, हिंदी, मराठी और गुजराती भाषा के कवियों को यह सम्मान प्रदान किया गया है।
प्रथम सम्मान कवि गोपाल कृष्ण अडिग को (1986-87) दिया गया।
वर्ष 2016-17 में श्री.के.शिवा रेड्डी, हैदराबाद को दिया गया है।

राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान

हिंदी साहित्य की रचनात्मक संरचना के क्षेत्र में उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिये वर्ष 1987 -88 में इस सम्मान की स्थापना की गई।
यह सम्मान राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त की स्मृति में रखा गया है।
इस सम्मान से सर्वप्रथम शमशेर बहादुर सिंह को (1987-88) नवाजा गया।
वर्ष 2016-17 में श्री कमल किशोर गोयनका को दिया गया।
इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए की राशि तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।

राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान

साहित्य एवं लेखन से संबंधित लोगों को इस सम्मान से नवाजा जाता है।
निबंध, संस्मरण, कोष, डायरी, पत्र और व्यंग लेखन के लिये यह सम्मान दिया जाता है।
इस सम्मान का उद्देश्य साहित्य की उपर्युक्त विधाओं की श्रेष्ठतम प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है।
श्री हरिशंकर परसाई, (1992-93) में यह सम्मान प्राप्त करने वाले प्रथम व्यक्ति थे।
यह सम्मान वर्ष 2016-17 में श्री नर्मदा प्रसाद उपाध्याय को प्रदान किया गया।
इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।

देवी अहिल्याबाई सम्मान

वर्ष 1996-97 में स्थापित देवी अहिल्याबाई सम्मान, आदिवासी, लोक कला और पारम्परिक कला में उत्कृष्टता के लिये केवल महिला कलाकारों को प्रदान किया जाता है।
सर्वप्रथम यह सम्मान 1996-97 में तीजन बाई को दिया गया था।
यह सम्मान वर्ष 2016-17 में श्री मती बसंती देवी बिष्ट (लोकगायिका) को प्रदान किया गया।
इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।

कालिदास सम्मान

इस सम्मान को वर्ष 1980-81 में स्थापित किया गया यह सम्मान शास्त्रीय संगीत, नृत्य-नाटक रंगकर्म और रूपंकर कला के क्षेत्र के लिये प्रदान किया जाता है।
1980-81 शास्त्रीय संगीत में पहली बार यह सम्मान पंडित सेमनगुडी श्री निवास अय्यर को दिया गया है।
राष्ट्रीय कालिदास सम्मान (रंगकर्म) से सम्मानित प्रथम व्यक्ति श्री शंभू मित्र थे वर्ष 2017-18 में श्री रामगोपाल बजाज को यह सम्मान प्रदान किया गया है।
इस सम्मान के तहत 2 लाख रुपए और प्रशस्ति पट्टिका का प्रदान की जाती है|

तुलसीसम्मान

यह पुरस्कार आदिवासी, लोक कला और पारम्परिक कला के लिये केवल पुरुषों को प्रदान किया है। इस सम्मान की स्थापना 1983-84 में की गई।
इस सम्मान से प्रथम बार हीरजी केशव एवं पं. गिरजा प्रसाद को नवाजा गया।
यह सम्मान तीन वर्ष में दो बार प्रदर्शनकारी कलाओं और एक बार रूपंकर कलाओं के क्षेत्र में दिया जाता है।
वर्ष 2016 में यह सम्मान श्री भीखुदान गढवी (लोक गायक) को प्रदान किया गया।
इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।

इकबाल सम्मान

उर्दू साहित्य में रचनात्मक लेखन के सम्मान के लिये वर्ष 1986-87 में यह सम्मान स्थापित किया गया।
इस सम्मान से सर्वप्रथम 1986-87 में अली सरदार जाफरी को सम्मानित किया गया।
इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।

कुमार गंधर्व सम्मान

संगीत के क्षेत्र में युवाओं के बीच रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिये वर्ष 1992-93 में कुमार गंधर्व सम्मान स्थापित किया गया है।
सर्वप्रथम यह सम्मान अजय चक्रवर्ती को 1992-93 में दिया गया।
इस सम्मान के अंतर्गत 1.25 लाख रुपए तथा प्रशस्ति पट्टिका प्रदान किया जाता है।

लता मंगेशकर सम्मान

सुगम संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्टता के सम्मान के लिये वर्ष 1984 में स्थापित किया गया।
किसी भी भाषा के गायक, वादक, और संगीतकार को यह परस्कार प्रदान किया जाता है।
इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए. तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।
इस सम्मान से सर्वप्रथम 1984-85 में नौशाद को नवाजा गया।

तानसेन सम्मान

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन तथा सृजनात्मक कार्यों को सम्मानित करने हेतु वर्ष 1980-81 में इस पुरस्कार की स्थापना की गई।
इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए तथा प्रशस्ति पट्टिका भंट की जाती है।
यह पुरस्कार सर्वप्रथम 1980 में पं. कृष्णराव शंकर पंडित को दिया गया।
वर्ष 2017 में पंडित उल्हास कशालकर को इस सम्मान से नवाजा गया।

महात्मा गांधी सम्मान

गांधीवादी दर्शन के आधार पर सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों को यह पुरस्कार प्रदानकिया जाता है इसे सर्वप्रथम कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट इंदौर (मध्य प्रदेश) को वर्ष 1995-96 में दिया गया।
इस सम्मान के अंतर्गत 10 लाख रुपए की राशि दी जाती है।

किशोर कुमार सम्मान

यह पुरस्कार वर्ष 1997-98 में स्थापित किया गया। हर वर्ष फिल्म निर्देशन, अभिनय पटकथा, लेखन और गीत लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये यह पुरस्कार प्रस्तुत किया जाता है
इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए तथा सम्मान पट्टिका भेंट की जाती है।
सर्वप्रथम यह पुरस्कार निर्देशन के क्षेत्र में श्री ऋषिकेश मुखर्जी को वर्ष 1997-98 में दिया गया।
वर्ष 2016-17 में श्री योगेश, (गीत लेखन) में प्रदान किया गया।

राज्य स्तरीय शिखर सम्मान (State Level Summit Honours)

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा कला, साहित्य नृत्य, नाटक, संगीत एवं दुर्लभ वाद्य वादन की विविध विधाओं के क्षेत्र में राज्य शिखर सम्मान प्रदान किये जाते है।
राज्य स्तरीय शिखर सम्मान के लिये मध्यप्रदेश के निवासी अथवा ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अपना कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश को बना लिया है, पात्र होगें।
यह सम्मान सृजन-सकिय कलाकारों/साहित्यकारों को उच्च सृजनात्मकता, असाधारण उपलब्धि, अनवरत दीर्घ साधना तथा समग्र रचनात्मक अवदान के लिए देय है। इस सम्मान के तहत लाख रुपए और प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।

जनजातीय सम्मान (Tribal Honours)

रानी दुर्गावती राष्ट्रीय सम्मान

यह सम्मान आदिवासी एवं पारम्परिक सृजनात्मक कला, शिल्प, समाज सेवा, प्रशासन में अद्वितीय उपलब्धि एवं योगदान के लिये आदिवासी महिला को दिया जाता है। इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए तथा प्रशस्ति पट्टिका प्रदान किया जाता है।
यह सम्मान किसी कृति, रचना या उपलब्धि के लिये न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिये दिया जाता है।
वर्ष 2008 में श्रीमती रोज केरकेट्टा, (झारखंड) को इस सम्मान से सम्मानित किया गया है।
वर्ष 2009 में श्रीमती भूरी बाई, झाबुआ एवं श्रीमती दुर्गा बाई व्याम, सुनपुरी डिंडौरी संयुक्त रूप से सम्मानित।

वीर शंकर शाह-रघुनाथ शाह राष्ट्रीय सम्मान

यह सम्मान भारतीय साहित्य में जनजातीय जीवन की सांस्कृतिक परम्परा और विशिष्टताओं पर लेखन के लिये तथा आदिवासी पारम्परिक कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय साधना के लिये दिया जाता है। इस सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।
वर्ष 2008 – श्री किनफाम सिनोंगकिनरिह, मेघालय सम्मानित
वर्ष 2009 – श्री जिव्या सोमा भाषे, महाराष्ट्र एवं डॉ. महेंद्र कुमार मिश्रा, भुवनेश्वर को संयुक्त रूप से (घोषणा)

ठक्कर बाबि राष्ट्रीय सम्मान

यह सम्मान गरीब, पीड़ित, पिछड़े आदिवासी, समुदाय को ममतापूर्ण सेवा एवं सदीर्घ साधना के लिये व्यक्ति/संस्था को दिया जाता है। इस राष्ट्रीय सम्मान के अंतर्गत 2 लाख रुपए एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
वर्ष 2008 – स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिषन, केरल सम्मानित।
वर्ष 2009 – वनबंधु परिषद कोलकाता (घोषणा)

जननायक टंट्या भील राज्यस्तरीय सम्मान

यह सम्मान मध्य प्रदेश शासन द्वारा शिक्षा और खेल गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन और उल्लेखनीय योगदान करने वाले आदिवासी युवाओं को दिया जाता है।
इस सम्मान के अंतर्गत एक लाख रुपए की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है।
वर्ष 2008 में यह सम्मान श्री राजाराम मौर्य को प्रदान किया गया था।

विष्णु कुमार समाज सेवा सम्मान

यह सम्मान मध्य प्रदेश शासन द्वारा समाजसेवा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिये दिया जाता है विख्यात समाजसेवी एवं सेवा भारती के संस्थापक श्री विष्णु कुमार को स्मृति में इस सम्मान की स्थापना की गई थी।

राज्य में पत्रकारिता पुरस्कार (Journalism awards in the State)

वर्ष 2006 में श्रेष्ठ पत्रकारिता के लिये स्व. मणिकचन्द्र वाजपेयी के नाम एक पुरस्कार की घोषणा की गई।
वर्ष 2013 में राजेन्द्र शर्मा (भोपाल) तथा वर्ष 2014 में बलदेव भाई शर्मा (दिल्ली) का चयन किया गया|
प्रदेश में उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिये उत्साहजनक वातावरण बनाए जाने और इस क्षेत्र में कार्य कर रहे अग्रणी पत्रकारों को सम्मानित करने के लिये प्रदेश शासन द्वारा कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता सम्मान प्रारंभ किये गए हैं।

खेल पुरस्कार (Sports Awards)

विक्रम पुरस्कार

यह पुरस्कार प्रदेश के सर्वोत्कृष्ट सीनियर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने हेतु दिया जाता है, जिसने पिछले 5 वर्षों में न्यूनतम 2 वर्षों तक वरिष्ठ वर्ग की राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में राज्य का प्रतिनिधित्व किया हो।

इसकी शुरुआत 1990 से हुई। इस पुरस्कार के अंतर्गत एक लाख रुपए, ब्लेजर, टाई, प्रतीक चिह्न एवं प्रमाणपत्र दिया जाता है।

विश्वामित्र पुरस्कार

यह पुरस्कार उन प्रशिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने पिछले पाँच वर्षों में कम-से-कम दो ऐसे खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया हो जिन्होंने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एकलव्य अथवा विक्रम पुरस्कार में दो स्वर्ण अथवा चार रजत पदकअथवा छ: कांस्य पदक जीते हों। पुरस्कार राशि 1 लाख रुपए है।

प्रदेश सरकार द्वारा सन् 1994 में इसकी स्थापना हुई। इसके अंतर्गत 1 लाख रुपए व प्रमाणपत्र दिये जाते हैं।

लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार

यह पुरस्कार राज्य के प्रशिक्षण/खिलाड़ियों को खेलों को प्रोत्साहित करने के लिये दिया जाता है इसके अंतर्गत एक लाखरुपए व प्रमाणपत्र दिया जाता है।

एकलव्य पुरस्कार

राज्य में 1994 से इस पुरस्कार की शुरुआत की गई। यह पुरस्कार राज्य के सर्वोत्कृष्ट जूनियर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने हेतु दिया जाता है। इसके अंतर्गत 50 हजार रुपए च प्रमाणपत्र दिये जाते हैं।

यह पुरस्कार 19वर्ष से कम उम्र के खिलाड़ियों को दिया जाता है।

विश्वामित्र पुरस्कार-2017

इस वर्ष का विश्वामित्र पुरस्कार दविंदर खनूजा (पावरलिफ्टिंग), इंदौर और तरुणा चावरे (मलखंब), उज्जैन को प्रदान किया गया।

स्व. श्री प्रभाष जोशी खेल पुरस्कार-2017

मलखंब खेल को प्रोत्साहन देने के लिये स्थापित इस वर्ष का स्व. श्री प्रभाष जोशी खेल पुरस्कार मलखंब खिलाड़ी चंद्रशेखर चौहान को प्रदान किया गया।

लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार-2017

इस वर्ष का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार स्व. प्रभाकर कुलकर्णी, को मरणोपरांत उनके क्रिकेट, खो-खो एवं कबड्डी में किये गए उल्लेखनीय योगदान के लिये दिया गया।

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