मध्यपदेश में उद्योग | Industries in Madhya Pradesh

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  • मध्यप्रदेश खनिज संसाधनों में प्रचुरता की दृष्टि से राष्ट्र के 8 प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में से एक है। मध्य प्रदेश भारत का चौथा सबसे खनिज समृद्ध प्रदेश है। (प्रथम तीन – 1. पश्चिम बंगाल 2. झारखंड 3. उड़ीसा)
  • इतने प्राक्रतिक संसाधनों के होते हुए भी मध्य प्रदेश औद्योगिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है, इसका मुख्य कारण आधारभूत संरचना, वित्तीय संसाधन, वैज्ञानिक कुशलता तथा विकसित तकनीक का अभाव है।
  • मध्य प्रदेश में औद्योगिक वितरण में काफी असमानता है, प्रदेश के 52 जिलों में से उद्योगों का केंद्रीकरण केवल भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, धार एवं कटनी आदी जिलों तक ही सीमित है।
  • मध्य प्रदेश में प्रति 100000 व्यक्तियों पर उद्योगों की संख्या 5.24 है।
  • मध्य प्रदेश के सकल मूल्य वर्धन में (स्थिर भावों पर) औद्योगिक क्षेत्र का योगदान 2017-18 में 24.14% है।
  • मध्यप्रदेश में विनिर्माण क्षेत्र की विकास 2018 – 19 में 5.71% अनुमानित है।
  • मध्य प्रदेश की जीडीपी में विभिन्न क्षेत्रों की हिस्सेदारी (2018-19 अनुमानित) है।
  • प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, खनन व मत्स्य)- 37.4%
  • द्वितीयक क्षेत्र (विनिर्माण क्षेत्र) – 24.14%
  • तृतीय क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) मध्य प्रदेश का निवेश में भारत में पांचवा स्थान है जबकि औद्योगिक विकास में सातवां स्थान है।
  • औद्योगिक नीति तथा संवर्धन विभाग द्वारा जारी इज ऑफ डूइंग बिजनेस में मध्य प्रदेश का स्थान व्यापार सुगमता में सातवां है।

जिलों का औद्योगिक वर्गीकरण

  • प्रदेश के जिलों को आद्योगिक दृष्टि से विकसित और पिछड़े जिले की श्रेणी में बांटा गया है।
  • प्रदेश के 5 जिलों को विकसित जिला माना गया है, जबकि शेष को पिछड़े जिले की श्रेणी में रखा गया है। पिछड़े जिलों को क्रमशः क, ख और ग तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जो निम्न अनुसार है
  • ” विकसित जिले – भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, कटनी
  • पिछड़े जिले क श्रेणी- देवास, होशंगाबाद, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, रतलाम, शहडोल, उज्जैन, विदिशा, सतना, नीमच, उमरिया, हरदा, श्योपुर
  • पिछड़े जिले ख श्रेणी – बैतूल, सीहोर ,
  • पिछड़े जिले ग श्रेणी- बालाघाट, भिंड, छतरपुर, दमोह, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी, मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर, ।
  • पन्ना, रायसेन, राजगढ़, रीवा, सिवनी, शाजापुर, शिवपुरी, सीधी, टीकमगढ़, सागर, छिंदवाड़ा, आगरमालवा, अलीराजपुर, सिंगरौली, अनूपपुर, निवाड़ी

राज्य के प्रमुख उद्योग

  • राज्य में स्थापित उद्योगों को प्रयुक्त होने वाले कच्चे पदार्थों के आधार पर निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है।

कृषि पर आधारित उद्योग

  • राज्य में कृषि पर आधारित प्रमुख उद्योग निम्नलिखित हैं –

चीनी उद्योग

  • यह वस्त्र उद्योग के बाद दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग है।
  • मध्य प्रदेश में सबसे पहले चीनी मिल वर्ष 1934 में जावरा, रतलाम में स्थापित हैं।
  • वर्तमान में प्रदेश में चीनी मिलों की संख्या 26 है।
  • चीनी मिलों की स्थापना मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में अधिक हुई है क्योंकि गन्ना उत्पादक जिले इस क्षेत्र में स्थित हैं।
  • प्रदेश का सहकारिता क्षेत्र का सबसे बड़ा चीनी कारखाना बरलाई इंदौर में स्थित है।
  • प्रदेश के मुख्य चीनी कारखाने
  • भोपाल शुगर मिल – सीहोर
  • सेठ गोविंद राम शुगर मिल – महिदपुर रोड उज्जैन
  • जीवाजी राव शुगर कंपनी लिमिटेड – दलोदा, मंदसौर
  • डबरा शुगर मिल लिमिटेड – डबरा, ग्वालियर
  • कैलारस शुगर मिल – कैलारस, मुरैना
  • पीतांबर शुगर मिल – दतिया
  • प्रदेश में गन्ना अनुसंधान केंद्र नरसिंहपुर में स्थित है।

वनस्पति घी

  • राज्य में तिलहन एवं सोयाबीन की कृषि व्यापक पैमाने पर की जाती है फलस्वरूप राज्य में वनस्पति घी बनाने की मीलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
  • वर्तमान में प्रदेश में 10 वनस्पति घी के कारखाने हैं।
  • वनस्पति घी बनाने के अधिकतर कारखाने तिलहन उत्पादक क्षेत्रों मालवा पठार, बेतूल, छिंदवाड़ा पठार, मध्य नर्मदा घाटी, चंबल की घाटी क्षेत्र में लगाए गए हैं।
  • प्रदेश के प्रमुख वनस्पति घी के कारखाने गंजबासौदा, जबलपुर, खंडवा, ग्वालियर, इंदौर, और मुरैना में स्थित है।
  • प्रदेश का सबसे बड़ा वनस्पति घी का कारखाना गंज बासौदा विदिशा में स्थित है।

सूती कपड़ा उद्योग

  • यह प्रदेश का सबसे बड़ा उद्योग है, प्रदेश में सबसे पहले सूती वस्त्र कपड़ा मिल बुरहानपुर वर्ष 1906 में स्थापित की गई थी जो असफल हई।
  • मध्यप्रदेश में सूती वस्त्र का प्रथम सफल कारखाना 1907 में मालवा मिल इंदौर में स्थापित किया गया था।
  • वर्तमान में सूती कपड़े के लगभग 513 कारखाने राज्य में कार्यरत है। तथा सूती वस्त्र उत्पादन में मध्यप्रदेश का तीसरा स्थान है।
  • इंदौर राज्य का सबसे बड़ा उत्पादक केंद्र है, इसी कारण इसे मध्य प्रदेश की वस्त्र राजधानी कहा जाता है।
  • खंडवा एवं खरगोन में कपास की खेती होने के कारण इसका केंद्रीकरण पश्चिमी भागों में हुआ है।
  • वर्तमान में इस उद्योग की जगह कृत्रिम रेशे लेते जा रहे हैं क्योंकि इनका कच्चा माल सस्ता एवं सर्वत्र सुलाभ है।

कृत्रिम रेशे का कपड़ा उद्योग

  • मध्यप्रदेश में कृत्रिम रेशे से कपड़ा बनाने का उद्योग अपेक्षाकृत नवीन उद्योग है। इसके लिए कच्चा माल मुंबई, स्वालियर तथा देवास की कृत्रिम रेशा उत्पादक मीलों से प्राप्त होता है।
  • यह उद्योग नागदा (उज्जैन), ग्वालियर देवास में है, ग्रेसिम फैक्ट्री नागदा में कृत्रिम रेशा बनाने का कारखाना है।
  • ऊनी कपड़ा बनाने का कारखाना इंदौर में है।

अन्य कृषि आधारित उद्योग

  • जूट उद्योग – सतना, अमलाई (शहडोल)
  • स्ट्राबोर्ड मिलें- शाजापुर
  • एमपी एग्रो मोरारजी फर्टिलाइजर्स लिमिटेड – इटारसी (होशंगाबाद)
  • जीवाणु खाद संयंत्र – भोपाल
  • कीटनाशक संयंत्र – बीना (सागर)
  • सरसों आयल मिल – मुरैना
  • पशु पोषण आहार संयंत्र – धार
  • मत्स्य आहार संयंत्र – सिवनी

रेशम उद्योग

  • रेशम की किस्में – मलबरी, मूंगा, इरी, टसर, ट्रॉपिकल्सर
  • मध्यप्रदेश में मलबरी, इरी और टसर का उत्पादन होता है, इनमें से मलबरी का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है।
  • प्रदेश के 44 जिलों में रेशम उद्योग संचालित है।
  • प्रदेश में मंडला प्रमुख रेशम उत्पादक क्षेत्र है।
  • मध्यप्रदेश में इरी रेशम के उत्पादन के कारण सिवनी को मध्य प्रदेश का लखनऊ कहा जाता है।
  • मध्यप्रदेश में रेशम की मंडी पंचमढ़ी में स्थापित है।
  • प्राकृतिक रेशम के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 1 सितम्बर 1984 को रेशम संचालनालय की स्थापना की गई।

सोयाबीन उद्योग

  • देश के कुल सोयाबीन का 48.46 प्रतिशत उत्पादन मध्य प्रदेश में होता है, इसी कारण मध्य प्रदेश को सोया राज्य कहा जाता है।
  • मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा सोयाबीन संयंत्र उज्जैन में स्थित है, जबकि सोयाबीन अनुसंधान केंद्र इंदौर में है
  • देश का सबसे बड़ा सहकारी क्षेत्र का सोयाबीन कारखाना सिवनी में है तथा सोयाबीन से बिस्कुट बनाने का कारखाना भोपाल में स्थित है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

  • मध्य प्रदेश का पहला खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बाबई होशंगाबाद में स्थापित किया गया था।
  • मध्य प्रदेश का प्रथम मेगा फूड पार्क कसरावद खरगोन में स्थापित
  • अन्य मेगा फूड पार्क – दालौद मंदसौर एवं कटनी में स्थित है।
  • निजी क्षेत्र का मेगा फूड पार्क देवास में है।
  • औद्योगिक विकास निगम द्वारा विकसित फूड पार्क – 1. जग्गा खेड़ी (मंदसौर), 2. निमरानी (खरगोन), 3. मालनपुर (भिंड), 4. बाबई (होशंगाबाद), 5. बोरगांव (छिंदवाड़ा), 6. मनेरी (मंडला)

खनिजों पर आधारित उद्योग

  • मध्यप्रदेश के खनिज पर आधारित प्रमुख उद्योग निम्नलिखित है

चीनी मिट्टी उद्योग

  • मध्य प्रदेश में चीनी मिट्टी पर्याप्त रूप से उपलब्ध है, यही कारण है कि प्रदेश में चीनी मिट्टी उद्योग में तेजी से वृद्धि हुई है।
  • प्रदेश में ग्वालियर,जबलपुर तथा रतलाम आदि क्षेत्रों में चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने के उद्योग स्थापित है।
  • राज्य में फायर क्ले ईटें, पाईप तथा बेसिन आदि कटनी एवं जबलपुर में बनाए जाते हैं।

सीमेंट उद्योग

  • मध्यप्रदेश में चूना पत्थर के भंडार बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं, जिससे प्रदेश में सीमेंट उद्योग की स्थापना में प्रगति हुई है।
  • राज्य में पहला सीमेंट कारखाना इस एसीसी द्वारा वानमोर मुरैना में वर्ष 1922 में स्थापित किया गया।
  • वर्तमान में कैमूर, सतना, मेहर, नीमच सहित प्रदेश में 23 सीमेंट कारखाने उत्पादन कर रहे हैं।

वनों पर आधारित उद्योग

प्रदेश में वन आधारित प्रमुख उद्योग निम्नलिखित हैं –

कागज उद्योग

  • राज्य में कागज उद्योग की स्थापना सर्वप्रथम 1948-49 में की गई थी। जब खंडवा (वर्तमान बुरहानपुर) में नेपानगर में नेशनल न्यूज़ प्रिंट एंड पेपर मिल (अखबारी कागज) की स्थापना की गई थी।
  • राज्य में शहडोल जिले के अमलाई में बिरला समूह द्वारा स्थापित निजी क्षेत्र का ओरिएंट पेपर मिल है।
  • इंदौर में महीन कागज (टिश्यु पेपर) बनाने का का कारखाना है। सिक्योरिटी पेपर मिल (नोट छापने का कागज) का कारखाना 1967-68 में होशंगाबाद में स्थापित किया गया था।
  • 2015 में होशंगाबाद के प्रतिभूति कारखाने में न्यू बैंक नोट पेपर लाइन’ का उद्घाटन तत्कालीन वित्तमंत्री अरुण जेटली किया।

बीडी उद्योग

  • प्रदेश में तेंदपत्ता का संग्रहण देश में सर्वाधिक (60%) होता है, यही कारण है कि बीड़ी उद्योग का विकास जबलपुर, सागर, कटनी, दमोह तथा सतना में हुआ है।
  • प्रदेश में बीड़ी बनाने के लगभग 280 कारखाने कार्यरत हैं।
  • इस उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र जबलपुर है।

लकड़ी उद्योग

  • इस उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र जबलपुर है। इसके अलावा राज्य के छिंदवाड़ा तथा मंडला में इमारती लकड़ी को चीरने के कारखाने कार्यरत हैं।
  • लकड़ी चीरने का सबसे बड़ा कारखाना मनेरी मंडला में स्थित है। वर्तमान में लगभग 113 कारखाने प्रदेश में इस उद्योग में लगे हुए है |

प्लाईवुड उद्योग

  • मध्य प्रदेश में प्रथम प्लाईवुड कारखाना 1964 में इटारसी में स्थापित किया गया था। छिंदवाड़ा एवं कोसमी बैतूल में प्लाईवुड तथा नक्काशीदार लकड़ी का कारखाना है।

कत्था उद्योग

  • खेर वृक्ष से कत्था बनाने का कार्य पूर्वी मध्य प्रदेश की खेरवार जनजाति द्वारा किया जाता है। शिवपुरी एवं बानमोर (मुरैना) में कत्था उत्पादक इकाइयां कार्य कर रही हैं।

लाख उद्योग

  • लाख एक प्राकृतिक रेजिन होता है जो केरिया लेक्का नामक कीट द्वारा स्रावित होता है।
  • राज्य के विंध्य क्षेत्र में लघु उद्योग का केंद्रीकरण है।
  • कच्चे लाख से सिड लाख बनाने का शासकीय कारखाना उमरिया में है।

चिप एवं माचिस डिब्बी उद्योग

  • चिप बोर्ड एवं पार्टिकल बोर्ड बनाने का कारखाना इटारसी में तथा माचिस की डिब्बी बनाने का कारखाना ग्वालियर में स्थापित है।

अन्य प्रमुख उद्योग

विदेशी सहायता से निर्मित प्रमुख उद्योग

  • भेल (BHEL) – इसकी स्थापना 1964 में ब्रिटेन की सहायता से भोपाल की गई थी, 2013 में महारत्न कंपनी का दर्जा दिया गया।
  • ऑप्टिकल फाइबर कारखाना – इसकी स्थापना मंडीदीप रायसेन में जापान की सहायता से की गई है।
  • नेशनल फर्टिलाइजर कारखाना – इसकी स्थापना 1984 में विजयपुर गुना में अमेरिका और इटली के सहयोग से की गई है।
  • तेल शोधक कारखाना – इसकी स्थापना 2008 में बीना के आगासोद में ओमान की सहायता से की गई है।

पंचवर्षीय योजना में उद्योगों का विकास

  • मध्यप्रदेश में तीसरी पंचवर्षीय योजना में BHEL(भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) भोपाल तथा नीमच में पॉवर अल्कोहल प्लाट की स्थापना की गई थी।
  • योजना अवकाश की अवधि 1967-68 में होशगाबाद में सिक्योरिटी पेपर मिल की स्थापना की गई थी।

रेल उपकरण उद्योग

  • देश का एकमात्र रेल स्प्रिंग कारखाना – ग्वालियर
  • रेल कोच फैक्ट्री निशातपुरा – भोपाल
  • रेलवे स्लीपर कारखाना – बुधनी सीहोर
  • रेलवे इंजन कारखाना – भोपाल
  • प्रथम डीजल लोकोमोटिव संयंत्र (2012 से प्रस्तावित) सीहोर
  • रेल इंजन कारखाना (2015 से प्रस्तावित) विदिशा

मध्यप्रदेश में संयुक्त क्षेत्र की प्रमुख योजनाएं

  1. मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भोपाल
  2. मध्य प्रदेश विद्युत यंत्र लिमिटेड, गोसलपुर (जबलपुर)
  3. मध्य प्रदेश लैंप्स लिमिटेड, विदिशा

अन्य उद्योग

  • रसायन उद्योग का निजी सार्वजनिक भागीदारी से उर्वरक एवं कीटनाशक संयंत्र रैसलपुर होशंगाबाद में स्थापित किया गया है।
  • विजयपुर गुना में गैस आधारित यरिया अमोनिया संयंत्र की स्थापना की गई है।
  • वाहन उद्योग का प्रमुख केंद्रीकरण पीथमपुर धार में है, इसी कारण इसे भारत का डेट्राइट कहा जाता है, इसके अलावा देवास में वाहन उद्योग के कारखाने है।
  • ओद्योगिक विकास केंद्र – मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम द्वारा इंदौर, जबलपुर, रीवा एवं ग्वालियर में चार औद्योगिक केंद्रों की घोषणा की गई।
  • इसी तारतम्य में बाद में राज्य शासन ने निम्न ओद्योगिक विकास केंद्रो की स्थापना की है – 1. पीथमपुर, धार, 2. पीलू खेड़ी, राजगढ़, 3. बानमोर, मुरैना, 4. मनेरी, मंडला. 5. हरदा, 6. पुरैना, पन्ना, 7. अमाना. दमोह,8. चंद्रपुरा, छतरपुर, 9. जावरा, रतलाम 10. चैनपुरा, गना. 11.बगसपरा, नरसिंहपर. 12. बैढन. सिंगरौली 13. बडेरा, दतिया, 14. मंडीदीप, रायसेन. 15. देवास. 16. मक्सी , शाजापुर, 17. किरनापुर, बालाघाट, 18. उद्योग विहार, रीवा, 19. मालनपुर, भिंड, 20. बंडोल, सिवनी, 21. बोरेगांव, छिंदवाड़ा, 22. सिद्धगांव, सागर, 23. मेघनगर, झाबुआ. 24. बूढोहरा, शिवपुरी, 25. प्रतापपुरा, टीकमगढ़. 26. विदिशा
  • केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत राज्य के औद्योगिक विकास केंद्र (06)
  1. पीथमपुर – धार,
  2. पुरैना – पन्ना,
  3. मालनपुर – भिंड,
  4. मेघनगर – झाबुआ,
  5. मनेरी – मंडला.
  6. पीलूखेड़ी – राजगढ़

मध्य प्रदेश में स्थापित प्रस्तावित विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र (स्पेशल इकोनॉमिक जोनाSEZ)

प्रदेश में आकर्षित हो रहे पूंजी निवेश प्रस्तावों की आवश्यकता अनुसार विकसित अधोसंरचना की आवश्यकता है SEZ वस्तुतः फॉरेन टेरिटरी के रूप में विकसित किए गए हैं, जिनका विवरण निम्नानुसार है.

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

  • मध्य प्रदेश सरकार द्वारा औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के तेज गति से औद्योगिक विकास के लिए प्रति 2 वर्ष में आयोजित किए जाते है।
  • शुरुआत 2007 में इंदौर से की गई थी, जिसका आयोजन कर्ता भारतीय उद्योग परिसंघ था।
  • इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन मैग्नीफिसेंट एमपी फरवरी 2019 में इंदौर में किया गया।

मध्य प्रदेश के भौगोलिक संकेतक

  • धातु शिल्प एवं बर्तन दतिया, टीकमगढ़
  • रतलामी सेव रतलाम
  • चमड़े के खिलौने इंदौर
  • महेश्वर साड़ी महेश्वर खरगोन
  • चंदेरी साड़ी अशोक अशोक नगर
  • बाघ प्रिंट धार
  • कड़कनाथ मुर्गा झाबुआ (अगस्त 2018)

मध्यप्रदेश में औद्योगिक नीति

  • मध्यप्रदेश में पहली औद्योगिक नीति 1972 में घोषित की गई थी तथा नवीन औद्योगिक नीति 2010 में घोषित की गई थी, वर्तमान में 2014 में नवीन औद्योगिक संवर्धन नीति लागू की गई है।
  • एकीकृत अधोसंरचनायोजना अंतर्गत स्वीकृत विकास केंद्र – 1. नार्दन टोला सतना, 2. नौगांव सागर, 3.लंबतरा कटनी, 4.निमरानी खरगोन, 5.जग्गा खेड़ी मंदसौर में है।
  • दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारे से संबंधित मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र के उद्योगों में निवेश के लिए निम्न स्थानों पर विश्व स्तरीय आधारभूत संरचना का विकास किया जा रहा है – 1. पीथमपुर धार- महू, 2. रतलाम – नागदा, 3. शाजापुर – देवास, 4.नीमच – नयागांव

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