मध्य प्रदेश के चंदेल वंश का इतिहास | History of Chandela Dynasty of Madhya Pradesh

  • चंदेल वंश का सत्तासूर्य बुंदेलखण्ड में अधिक चमका
  • चंदेल वंश ने महोबा में शासन किया था इस वंश का संस्थापक नन्नुक था
  • राजा धंगदेव के शासनकाल में चंदेलों ने प्रतिहारों से स्वतंत्र होकर अपने राज्य का विस्तार किया था
  • खजुराहो चंदेल वंश की राजधानी थी
  • इस वंश के प्रारंभिक शासक प्रतिहारों के सामंत थे ।
  • यशोवर्मन (925-950) के शासनकाल में चंदेल सत्ता चरमोत्कर्ष पर थी
  • इसने खजुराहो के विष्णु मंदिर का निर्माण करवाया।
  • धंगदेव (950-1002) को चंदेल सत्ता का वास्तविक संस्थापक माना जाता है ।
  • ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि धारण की
  • खजुराहो की विश्वविख्यात् मंदिर स्थापत्य कला ‘चंदेल शैली’ का जनक माना जाता है ।
  • अंतिम चंदेल शासक परमार्दी देव (परिमल) को कुतुबुद्दीन ऐबक ने हराकर महोबा को अपने राज्य में मिला लिया था
  • बुंदेलखण्ड के दो प्रसिद्ध सूरमा आल्हा और उदल परमार्वीदेव के साले थे जिनकी वीरता के गीत आज भी गाये जाते हैं
  • चंदेल शासक जय शक्ति के नाम पर ही बुंदेलखंड का नाम जैजाभक्ति पड़ा
  • यशोवर्मन ने कलिंग कलिंजर का किला जीता था खजुराहो में विष्णु मंदिर बनवाया विष्णु मूर्ति उसने प्रतिहार नरेश नेपाल को हराकर कन्नौज से प्राप्त की थी
  • खजुराहो के जगदंबे और चित्रगुप्त मंदिर गंडदेव के शासन में बनाए गए।
  • गंडदेव का पुत्र विद्याधर हुआ जिसने हिन्दू संघ से भागे राजा राज्य पाल प्रतिहार की हत्या की ।
  • कंदरिया महादेव मंदिर विद्याधर ने बनवाया था।

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