मध्य प्रदेश के राजवंश | बेगमों का शासन

कुदसिया बेगम

  • नवाब नजर मोहम्मद खान की मृत्यु के पश्थात उनकी पत्नी गौहर बेगम जिन्हें कुदसिया बेगम भी कहा जाता था, भोपाल की शासक बनी जहां से भोपाल में महिलाओं के शासन का महान युग आरंभ हुआ
  • भोपाल स्थित शौकत महल का निर्माण 1830 ई. में कुदसिया बेगम ने कराया था ।
  • भोपाल स्थित जामा मस्जिद का निर्माण कार्य कुदसिया बेगम ने 1832 ई. में शुरू करवाया था यह जामा मस्जिद 1857 ई. में बनकर पूर्ण हुई

सिकंदर जहान बेगम

  • 1844 में जहांगीर मोहम्मद खान की मृत्यु के बाद उसकी 7 वर्षीया पुत्री शाहजहां बेगम को शासन व्यवस्था के आधीन रियासत की प्रमुख घोषित किया गया।
  • लेकिन जुलाई 1847 ई. को भोपाल में एक दरबार आयोजित किया गया दरबार में कैप्टन डी कनिंघम ने सिकंदर जहां बेगम को रियासत का वास्तविक शासक स्वीकार किया और उन्हें सियासत की समस्त शासन शक्तियों का उपयोग करने की अनुमति दी।
  • इसी समय रायसेन जिले की सिलवानी तहसील में गढ़ अंबापानी के जागीरदार मोहम्मद फाजिल खान तथा आदिल खान ने 1857 की क्रांति में सिहोर में विद्रोह की शुरुआत की
  • सिकंदर बेगम ने क्रांति के दौरान अंग्रेज अधिकारियों को शरण दी और सागर तथा बुंदेलखंड में हो रहे विद्रोह को दबाने के लिए सैनिक टुकड़ी भी भेजी
  • 5 अगस्त 1857 को सीहोर में विद्रोह हुआ जिसमें सीहोर छावनी पर कब्जा कर लिया गया ।

सिपाही बहादुर सरकार

  • बेगम के खिलाफ भोपाल के फौजियों महावीर और वली शाह ने 6 अगस्त 1857 को सीहोर में “सिपाही बहादुर” नाम की एक नई हुकूमत की नींव डाली, सिपाही बहादुर सरकार के शासन में दो झण्डे निशाने महावीरी और निशाने मोहम्मदी फहराये जाते थे।
  • यह देश की अनूठी और इकलौती क्रांतिकारी सरकार 6 माह तक चली।
  • इस सरकार के दमन में सबसे पहले कर्नल हिरोज ने 14 जनवरी 1858 को सीहोर में 356 क्रांतिकारियों को गोलियों से छलनी कर दिया, फिर 31 जनवरी 1858 को यह सरकार तब समाप्त हो गई जब फाज़िल मोहम्मद खाँ को राहतगढ़ किले के दरवाजे पर जनरल रोज़ के आदेश से मृत्यु दण्ड दिया जाकर फांसी पर लटका दिया गया ।
  • 7 जनवरी 1861 ई. में भारत के वायसराय केनिंग द्वारा जबलपुर में एक दरबार आयोजित किया गया जिसमें सिकंदर जहां बेगम को विशेष रूप से आमंत्रित कर ब्रिटिश शासन की निष्षा पूर्ण सेवा और सहयोग के पुरस्कार स्वरूप बैरसिया परगना जो की धार रियासत के अधीन था दिया गया।
  • सिकंदर जहां बेगम ने मोती मस्जिद और मोती महल का निर्माण 1860 में कराया था ।

शाहजहाँ बेगम

  • सिकंदर बेगम की मृत्यु पर, शाहजहाँ बेगम पूरी शक्तियों के साथ भोपाल की शासक बन गईं।
  • शाहजहां बेगम के काल में भोपाल में प्रशासन, स्थापत्य और न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में काफी कार्य हुए जिसमें आधुनिक पद्धति से राज्य की दूसरी जनगणना कराना, (रियासत भोपाल की पहली जनगणना सिकंदर बेगम के काल में की गई थी), भोपाल इटारसी रेल लाइन 1884 ई. में प्रारंभ हुई, न्याय व्यवस्था के सुधार के लिए “सदर उस सदूर “की स्थापना की गई,
  • शाहजहां बेगम ने पूरी रियासत का दौरा किया तथा कई सुधार कार्य किए ।
  • शाहजहां बेगम को भवनों के निर्माण का बहुत शौक था । उसने इंग्लैंड में भी एक मस्जिद बनवाई
  • भोपाल में शाहजहांनाबाद मोहल्ला बसाया।
  • उसने अपने लिए एक नया महल ताजमहल, नूर मस्जिद, बेनजीर मंजिल, नूर महल, निशात मंजिल, नवाब मंजिल, आली मंजिल, ताजुल मसाजिद बनवाईं।
  • पहाड़ी पर जेलखाना तथा पोलीटिकल एजेन्ट के रहने के लिए लाल कोठी बनवाई
  • नवाब जहांगीर मोहम्मद खान और सिकन्दर बेगम के मकबरे बनवाए।

कैखुसरु जहान बेगम ‘सरकार अम्मा’

  • शाहजहां बेगम के देहांत के बाद उनकी पुत्री कैखुसरु जहान बेगम ‘सरकार अम्मा’ उत्तराधिकारी बनी।
  • उसने अहमद अली खान से शादी की थी जिसे “्वजीरुद दौला” की उपाधि दी गई थी।
  • महारानी सुल्तान जहान बेगम के शासन के दौरान कई महत्वपूर्ण इमारतों का निर्माण किया गया था।
  • वह शिक्षा की संरक्षक थीं । उनके समय के दौरान, सुल्तानिया बालिका विद्यालय और अलेक्जेंडरिया नोबल स्कूल (अब हमीदिया हाई स्कूल के रूप में जाना जाता है) की स्थापना की गई थी।
  • उसने नूर-उस-सबा’ नामक एक नए महल का निर्माण भी किया, जिसे एक हेरिटेज होटल में परिवर्तित कर दिया गया है।
  • वह शिक्षा पर अखिल भारतीय सम्मेलन की पहली अध्यक्ष थीं और अलीगढ़ मुस्लिम विश्रविद्यालय की पहली चांसलर थीं

नवाब हमीदुल्ला खान

  • 1926 में नवाब हमीदुल्ला खान ने शासन संभाला।
  • इनके कार्यों से प्रसन्न होकर सुल्तान बेगम ने इन्हें इफ्खार उल मुल्क (देश का गौरव) की उपाधि दी थी
  • वह दो बार 1931-32 में एवं एक बार फिर 1944-47 में चैंबर ऑफ प्रिंसेस के चांसलर के रूप में चुना गया, इसी हैसियत से 1930 में लंदन में हुई गोलमेज कांफ्रेंस और 1931 में दूसरी गोलमेज कांफ्रेंस में भाग लिया ।
  • सन 1947 में नवाब ने एक नामजद मंत्रिमंडल का गठन किया जिसमें राजा अवधनारायण बिसारिया प्रधानमंत्री, के.एफ. हैदर वित्त मंत्री, मुजफ्फर अली खां खाद्य मंत्री, सईद उल्ला खां रज्मी स्वास्थ्य व शिक्षा मंत्री एवं भैरों प्रसाद लोक निर्माण मंत्री बनाये गये थे
  • इस मंत्रिमंडल के गठन के बाद मार्च, 1948 में नवाब हमीदुल्लाह ख़ान ने भोपाल को एक अलग रियासत का स्वरूप प्रदान करने की दृष्टि से मालगुज़ारी माफी का ऐलान किया, जिसका भारी विरोध हुआ तथा मंत्रिमंडल का नया गठन हुआ
  • हालांकि, विलय के लिए समझौते पर 30 अप्रैल, 1949 को शासक ने हस्ताक्षर किए थे और राज्य को 1 जून, 1949 को मुख्य आयुक्त के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा ले लिया गया था
  • विलय के बाद, भोपाल राज्य को भारतीय संघ के एक भाग राज्य सी ‘राज्य के रूप में बनाया गया था । बाद में 1 नवंबर, 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप, भोपाल सी राज्य या मध्य प्रदेश बन गया।
  • भोपाल के बड़े तालाब के बीच स्थित टापू पर सूफी संत शालेशाह दाता की मजार है यह नवाब फैज मोहम्मद खान के समकालीन थे,

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