मध्य प्रदेश के राजवंश | गुर्जर प्रतिहार वंश | Dynasty of Madhya Pradesh | Gurjara Pratihara Dynasty

  • 8वीं शताब्दी ई. में उज्जैनी में एक गुर्जर प्रतिहार राजवंश की स्थापना हुई
  • इस वंश का सर्वप्रथम शासक नागभट्ट प्रथम था, इसे ‘हरिशचन्द्र’ के नाम से भी जाना जाता था।
  • उसके विषय में ग्वालियर अभिलेख से जानकारी मिलती है, जिसके अनुसर उसने अरबों को सिंध से आगे नहीं बढ़ने दिया ।
  • मिहिर भोज इस वंश का एक शक्तिशाली शासक था जिसने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया
  • मिहिर भोज के शासनकाल में बुंदेलखंड पुनःप्रतिहारों के अधीन हो गया ।
  • मध्य प्रदेश में मिहिर भोज के तीन अभिलेख मिले हैं जिनमें दो अभिलेख ग्वालियर से तथा एक अभिलेख ग्वालियर जिले के सागर ताल नामक स्थान से प्राप्त हुआ है।
  • दौलतपुर अभिलेख में मिहिर भोज को प्रभास एवं ग्वालियर अभिलेख में आदि वराह उपाधियों से विभूषित किया गया है।
  • इनमें सर्वाधिक उल्लेखनीय मिहिरभोज का ग्वालियर अभिलेख है, जो एक प्रशस्ति के रूप में है।
  • कश्मीरी कवि कल्हण की राजतरंगिणी से मिहिरभोज की उपलब्धियों का पता चलता है।
  • सुलेमान एक अरब यात्री था, जो गुर्जर प्रतिहार शासक मिहिरभोज के समय में भारत आया था तथा इसने मिहिरभोज की शक्ति एवं उसके राज्य की समृद्धि की प्रशंसा की है।
  • अरब यात्री अलमसूदी 10 वी. शता. में प्रारंभ में पंजाब में आया था । अलमसूदी ने महीपाल प्रथम के विषय में सूचनायें हम लोगों को प्रदान की हैं

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