मध्य प्रदेश के प्रमुख राजवंश | प्राचीन काल के राजवंश

मध्य प्रदेश के प्राचीन काल के प्रमुख राजवंश एवं उनका योगदान :-

कारुषवंश

अनुश्रुति अनुसार मनुष्य की परम्परा में अंतिम बिन्दु वैवस्त हुए जिनके 10 पुत्र थे जिनमें से एक पुत्र कारूष नाम का था
कारूष ने वर्तमान बघेलखंड पर शासन किया

चन्द्रवंश

मनु वैवस्त की पुत्री इला का विवाह सोम चंद्र से हुआ था इनके राज्य का नाम ऐल साम्राज्य हुआ जिसका आदि पुरुष चन्द्र ही था 
सोम चंद्रवंश के साम्राज्य का विस्तार बुंदेलखण्ड तथा सोम के पुत्र आयु और अमावसु हुए ।

नंदवंश

मगध में नंद वंश राजा महापदम नंद ने साम्राज्य विस्तार की नीति के अंतर्गत केडी को मगध राज्य में मिलाया गया । 
म.प्र. के बड़वानी से नंदवंश की मुद्राँएँ प्राप्त हुई थी ।

क्षहरात वंश

भुमक और नहपान नामक दो प्रसिद्ध राजा इस वंश में हुए 
नहपान का संघर्ष गोमतीपूर्ण में सातकर्णि से हुआ था। नहपान इसके पूर्व मध्य प्रदेश के कई क्षेन्रों पर अधिकार कर चुका था जुगलथूम्बी से भी नहपान के पुनर्मुद्रित सिक्के मिले हैं। 
शिवपुरी से भी नहपान के सिक्के प्राप्त हुए है। 
क्षहरात वंश का सबसे प्रतापी क्षत्रप नहपान था । जैन साहित्य में इसका उल्लेख नरवाहन अथवा नववाहन के रूप में हुआ है। 
पेरिप्लस ऑफ दी एरिथियन सी' नामक पुस्तक में नहपान का वर्णन नैम्बैनस नाम से है
नहपान का राज्य मध्य प्रदेश के मंदसौर और उज्जैन में भी था । 
नहपान की राजधानी मिन्नगर थी । कुछ विद्वान मिन्नगर को मंदसौर मानते हैं।

कार्दम्क वंश

यशोमतिक और उसके पुत्र चष्टन का शासन द्वारा स्थापित उज्जैन का शक राज्य कार्म्दक वंशीय था 
इसका प्रसिद्ध राजा रूद्रदामन संस्कृत का महान पंडित था 
उसके गिरनार स्थित संस्कृत अभिलेख अनुसार सौराष्ट्र में सुदर्शन चषटन का पुनर्निर्माण रुद्रदामन ने कराया था 
उसने ही सर्वप्रथम तिथि युक्त चांदी के सिक्के मध्यप्रदेश में चलवाए थे। 
इसका अन्तिम शासक रुद्रसिंह तृतीय था जिसे चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने उज्जैन का विलय गुप्त साम्राज्य में कर लिया 
टॉलमी के अनुसार चष्टन के सिक्के उज्जैन तथा शिवपुरी में मिले हैं। 
महाक्षत्रप रुद्रदामन ने भी अपनी राजथानी उज्जयिनी में ही रखी 
इस वंश से संबंधित शासकों के सिक्के म.प्र. के शिवपुरी, साँची, सिवनी, बेसनगर, आवरा, गोंदरमऊ से मिले हैं 

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