यूरोपियों का आगमन

यूरोपियों का आगमन

  • पर्तगाली खोजकर्ता डिओगो कैओ ने वर्तमान नामीबिया के दक्षिण अफ्रीकी तट की खोज की और बार्टोलोम्यो डियास ने 1488 में केप ऑफ गाड होप को खोजा।
  • वास्को डी गामा ने 1498 में भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज की
  • यरोपीय कम्पनियों का भारत में प्रवेश निम्राकित क्रम में हुआ- पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, डेनिस, फ्रांसीसी और स्वीडिश।

पुर्तगाली / Portuguese

  • पुर्तगाली नाबिक वास्कोडिगामा ने 1498 में भारत की खोज की थी।
  • फ्रांसिस्को-डी-अल्मीडा भारत में पहला पुर्तगाली गर्वनर था
  • अल्फांसो-डी-अल्बुकर्क भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक था, वह 1509 ई. से 1515 ई. तक भारत में रहा। उसने 1510 ई. में गोवा पर अधिकार कर उसे प्रमुख पुर्तगाली व्यापारिक केन्द्र बनाया। कम्पनी’ का प्रादुर्भाव हुआ।
  • प्रारंभ में अल्बुकर्क ने कोचीन को मुख्यालय बनाया था | 1530 में नीनो-द-कुन्हा नामक वायसराय ने मुख्यालय कोचीन से गोवा स्थानांतरित कर दिया |
  • नए पुर्तगाली गवर्नर अल्फांसो डिसूजा (1542-1545 ई.) के साथ प्रसिद्ध जेसुढृ सन्त फ्रांसिस्को जेवियर भारत आए।
  • पुर्तगालियों के भारत आगमन से भारत में तम्बाकू की खेती, आलू की खेती, जहाज निर्माण एवं प्रिटिग प्रेस का सूत्रपात हुआ। 1556 ई. में पुर्तगालियों ने भारत में प्रथम प्रिटिग ग्रेस स्थापित किया।

डच /Dutch

  • 1596 ई में कॉरनेलिस-डी-हस्तमान, केप आफ गुड होप होते हुए सुमात्रा तथा बण्टाम पहुंचने वाला प्रथम डच नागरिक था।
  • 20 मार्च, 1602 ई. को भारत में व्यापार के लिए प्रथम ड़च कम्पनी ‘यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कम्पनी’ का प्रादुर्भाव हुआ। इस कम्पनी को डच संसद द्वारा 21 वर्षों तक के लिए भारत और पूर्व के देशों के साथ व्यापार करने, आक्रमण और विजय के सम्बन्ध में अधिकार पत्र दिया गया।
  • डचों ने भारत में कोरोमण्डल तट, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात तथा बंगाल में कारखाने स्थापित किए।
  • सत्रहवीं शताब्दी में भारत में मसाले के व्यापार पर डचों का एकाधिकार था। डचों द्वारा भारत से नील, शोरा एवं सूती वर्त्र का निर्यात किया जाता था।
  • बंगाल से डच मुख्यतः सूती बस्त्र, रेशम, शोरा और अफीम आदि का निर्यात करते थे।

अंग्रेज /English(British)

  • 1599 ई. जॉन मिल्डेनहाल (ब्रिटिश यात्री) थल मार्ग से भारत आया था।
  • 1599 ई. में इंगलैण्ड में एक ‘मर्चेण्ट एडवेंचर्स’ नामक दल ने अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी (दि गवर्नर एण्ड कम्पनी ऑफ मर्चेण्ट्स ऑफ ट्रेर्डिग इन टू द ईस्ट इण्डीज) की स्थापना की थी। दिसम्बर 1600 ईई. में ‘ईस्ट इंडिया कम्पनी’ की स्थापना हई, जिसे ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने 15 वर्षों के लिए पूर्वी व्यापार का एकाधिकार प्रदान किया।
  • 1608 ई. में इंग्लैड के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में कैप्टन हॉकिन्स, मुगल सम्राट जहांगीर से मिलने आगरा पहुंचा।
  • सम्राट जहांगीर ने हॉकिन्स से प्रसन्न होकर उसे 400 का मनसब और जागीर प्रदान की थी।
  • 1613 ई. में जहांगीर ने एक फरमान द्वारा अंग्रेजों को सूरत में स्थायी रूप से कोठी खोलने का अनुमति प्रदान की।
  • मुगल सम्राट जहांगीर से व्यापारिक सन्धि करने के उद्देश्य से इंग्लैंड के सम्राट जेम्स प्रथम का एक दूत ‘सर टॉमस रो’ 1615 ई में जहांगीर के दरबार में आया।
  • अंगेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी ने दक्षिण भारत में अपना पहला कारखाना 1611 ई. में मसूलीपट्टम और पेटापली में स्थापित किया।
  • 1633 ई. में पूर्वी तट पर अंग्रेजों ने अपना पहला कारखाना बालासोर और हरिहरपुरा में स्थापित किया था।
  • 1698-99 ई. में बंगाल के सूबेदार अजीमुश्शान की स्वीकृति से कम्पनी को 1,200 रुपए के भुगतान देने पर सुतानाटी, गोविन्दपुर और कालिकाता की जमींदारी प्राप्त हुई।
  • कालिकाता, गोविन्दपुर और सुतानाटी को मिलाकर आधुनिक नगर कलकत्ता की स्थापना जॉब चॉरनॉक ने की थी।
  • कालान्तर में कलकत्ता में ही फोर्ट विलियम का निर्माण हुआ। 1700 ई. में स्थापित फोर्ट विलियम का प्रथम गवर्नर सर चार्ल्स्स आयर बना।
  • 1715 ई. में मुगल सम्राट फर्रुखसियर के दरबार में एक अंग्रेजी प्रतिनिधिमण्डल आया। इस प्रतिनिधिमण्डल में शामिल शल्य चिकित्सक हैमिल्टन ने फर्खससियर की एक दर्दनाक बीमारी को ठीक किया था, जिससे प्रसन्न होकर मुगल सम्राट ने 1717 ई. में तीन फरमान जारी करके कम्पनी को अनेक महत्वपूर्ण अधिकार दे दिए।
  • इसके तहत अग्रेजों को तीन हजार वार्षिक कर के अतिरिक्त और कुछ भी न देकर बंगाल में व्यापार करने के अधिकार की पुष्टि की गई। उन्हें किराये पर कलकत्ता के आसपास की अतिरिक्त भूमि लेने की अनुमति मिल गई।
  • इसके अतिरिक्त बम्बई में कम्पनी द्वारा ढाले गये सिक्कों को सम्पूर्ण मगल राज्य में पहली बार चलाने की अनुमति भी दे दी गई।
  • 1717 ई. के मुगल सम्राट के फरमान को ‘कम्पनी का मैग्राकार्टा’ कहा जाता है।

डेनिस /Dennis

  • डेनमार्क की ईस्ट इंडिया कमपनी की स्थापना 1616 ई. में हुई थी। इस कम्पनी ने 1620 ई. में त्रैकोबार (तमिलनाडु) और 1676 ई. में सेरामपुर (बंगाल) में अपनी व्यापारिक कोठियां स्थापित की थी।
  • सेरामपुर डेनों का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र था। 1845 ई. में ड़ेनों ने अपनी भारतीय वाणिज्यिक कम्पनी को अग्रेंजों को बेच दिया।

फ्रांसीसी / French

  • फ्रांसीसी सम्राट लुई चौदहवें के मंत्री कॉलबर्ट द्वारा 1664 ई. में ‘गेंच ईस्ट इंडिया कम्पनी’ की स्थापना की गई थी। इृसे “कम्पनी देस इण्डेस ओरियण्टलेस’ कहा जाता था।
  • 1692 ई. में बंगाल में शाईस्ता खां (बंगाल का मुगल सूबेदार), की अनुमति से ग्रेंच कम्पनी ने चन्द्रनगर की स्थापना की।
  • 1731 ई. में चन्द्रनगर के प्रमुख फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले की नियुक्ति से भारत में फ्रांसीसी प्रभावी बने।
  • 1668 ई. में फ्रेंसिस कैरो के नेतृत्व में इस कम्पनी ने सूरत में अपना प्रथम व्यापारिक कारखाना स्थापित किया।
  • 1669 ई. में मर्कारा ने गोलकुण्डा के सुल्तान की स्वीकृति से मसूलीपट्टम में दूसरी फ्रेंच फैक्टरी की स्थापति की।
  • 1673 ई. में कम्पनी के निदेशक फ्रेसिंस मार्टिन ने बलिकोण्डापुर के सूबेदार शेरखां लोदी से पर्दुचुरी नामक एक गांव प्राप्त किया, जिसे कालान्तर में पाण्डिचेरी नाम से प्रसिद्धि मिली।

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