बेरोजगारी | Unemployment

बेरोजगारी की परिभाषा (Defition of unemployment)

बंरोजगारी वह स्थिति है जब एक व्यक्ति सक्रियता से रोजगार की खोज करता है, लेकिन वह काम पाने में अक्षम रहता है। बेरोजगारी को सामान्यत: अर्थव्यवस्था की स्थिति मापने के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
बेरोजगारी दर, बेरोजगार व्यक्तियों की वह संख्या है, जो श्रम बल में शामिल व्यक्तियों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त होती है। भारत में बेरोजगारी से संबंधित आंकडें राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा जारी किये जाते हैं।

बेरोजगारी के कारण (Causes of unemployment)

  • धीमी आर्थिक विकास
  • ठेकेदारों के कारण मजदूरों को एक विशेष मौसम में रोजगार प्रदान करना
  • जनसंख्या में तीव्र वृद्धि
  • कृषि को एक मौसमी पेशा के रूप में अपनाना
  • दोषपूर्ण योजना
  • संयुक्त परिवार व्यवस्था
  • सिंचाई अवस्था में विषमता
  • लघु एवं कुटीर उद्योग में गिरावट
  • मजदूरों की स्थिरता
  • औद्योगीकरण को धीमी वृद्धि
  • जाति व्यवस्था
  • यंत्रीकरण में वृद्धि
  • बचत एवं निवेश की कमी
  • दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली
  • श्रमिकों में गतिशीलता की कमी
  • कृषि का एक फसली स्वरूप
  • विदेशों से भारतीय एवं शरणार्थियों का आगमन
  • प्राकृतिक प्रकोप
  • निम्न उत्पादकता तथा क्षमता का अपूर्ण प्रयोग

भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India)

भारत में बेरोजगारी दर हमेशा काफी तीव्र रही है। वृहद् जनसंख्या एवं रोजगार अवसरों में धीमी वृद्धि के कारण भारत में व्यापक बेरोजगारी बनी रहती है। व्यापक बेरोजगारी से विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समस्याएँ, जैसे- गरीबी कुपोषण असामाजिक एवं आपराधिक गतिविधियाँ, नशीले पदार्थों की लत आदि उत्पन्न होते हैं।
1990 के दशक में महत्त्वपर्ण आर्थिक सुधार शुरू किये गए थे। इन सुधारों का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य रोजगार को बढ़ावा देना था। हालांकि उत्पादकता को बढ़ाने तथा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करने में ये आर्थिक सुधार सफल हुए थे लेकिन अपेक्षित रोजगार में वृद्धि नहीं हो सकी।

बेरोजगारी के प्रकार (Types ofunemployment)

बेरोजगारी के प्रकार निम्नलिखित हैं Following are the types of unemployment

पूर्ण बेरोज़गारी व अर्द्ध बेरोजगारी:

अगर किसी व्यक्ति के पास एक वर्ष में 35 से भी कम दिनों का रोजगार हो तो वार्षिक स्तर पर उसे ‘पूर्ण बेरोजगार’ मान लिया जाता है। यदि उसके कार्य दिवस 35 से ज्यादा एवं 135 से कम दिनों का हो तो उसे ‘अर्द्ध बेरोजगारी’ कहते हैं। वहीं 135 से ज्यादा दिनों के रोजगार की स्थिति हो तो उसे ‘पूर्ण रोज़गार’ कहा जाएगा।

प्रच्छन्न बेरोज़गारी:

जब किसी काम में जरूरत से ज्यादा व्यक्ति शामिल रहते हैं, जबकि उतने लोगों की जरूरत नहीं होती है, यह स्थिति ‘प्रच्छन्न बेरोजगारी’ की है। कृषि क्षेत्र में हम देखते हैं कि एक परिवार के सभी सदस्य एक ही कार्य में लगे रहते हैं। जबकि यह संभव है कि संबंधित कृषि कार्य 3-4 व्यक्ति ही कर लें, लेकिन उसी कार्य में 8-9 व्यक्ति संलग्न रहते हैं, इसका कारण यह होता है कि परिवार के अन सदस्य कार्य ढूंढ़ने में सक्षम नहीं होते हैं।
वर्तमान में भारत में कृषि क्षेत्र में लगे प्रच्छन्न बेरोजगारी की उत्पादकता ऋणात्मक है। खुदरा व्यापार में भी प्रच्छन्न बेरोजगारी है, वहीं सरकारी विभागों में भी विशेषकर राज्य सरकार के विभागों में भी प्रच्छन्न बेरोजगारी है। प्रच्छन्न बेरोजगारी को दूर करने का एकमात्र समाधान गैर-कृषि कार्यों में रोजगार की संख्या में वृद्धि करना है। प्रच्छन्न बेरोजगारी को छद्म बेरोज़गारी भी कहते है।

संरचनात्मक बेरोज़गारी:

यदि देश की उत्पादक संस्थाओं की कम संख्या एवं पुरातन प्रकृति के कारण रोजगार के अवसर सीमित रह जाते हों और श्रम शक्ति का एक बड़ा वर्ग बेरोजगार रह जाता हो तो इस समस्या को संरचनात्मक बेरोजगारी कहते हैं। यह एक दीर्घकालिक समस्या है।

चक्रीय बेरोज़गारी

उत्पादक संस्थाओं में समायोजन के दौरान अथवा बाजार परिवेश में परिवर्तन के दौरान रोजगार की संख्या में होने वाली अल्पकालिक गिरावट के फलस्वरूप उत्पन्न बेरोजगारी को चक्रीय बेरोजगारी कहते हैं। यह बेरोज़गारी अल्पकालिक होती है भारत के बड़े महानगरों व आई.टी. केंद्र में विश्वव्यापी मंदी के कारण चक्रीय बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हुई है।
उपभोक्ता के विश्वास में कमी, अरुचि या उपभोक्ता व्यय में कमी की वजह से उत्पादों की मांग में कमी आ जाती है, जिससे उत्पादन से जुड़े कार्यबल उत्पादन में कमी कर देते हैं। उत्पादन में कमी के कारण कंपनियाँ भी कार्यबलों में कटौती करने लगती हैं जिससे चकीय बेरोज़गारी उत्पन्न होती है।

ऐच्छिक बेरोज़गारी

जब लोग वर्तमान वेतन दर पर कार्य करने के लिये तैयार नहीं होते हैं और जिन्हें अपनी संपत्ति या अन्य स्रोतों से निरंतर आमदन होती रहती है तथा उन्हें काम करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती, इस स्थिति को ऐच्छिक बेरोज़गारी कहते हैं ।

अनैच्छिक बेरोज़गारी

जब को व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने की इच्छा रखता हो, किंतु काम की उपलब्धता न हो, अनैच्छिक बेरोजगारी कहते हैं।

मौसमी बेरोज़गारी

इसके अंतर्गत किसी विशेष मौसम या अवधि में प्रतिवर्ष उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी को सम्मिलित किया जाता है। भारत में कृषि क में सामान्यतः 7-8 माह का होता है तथा शेष महीनों में खेती में लगे व्यक्ति बेरोजगार होते हैं।

अस्थायी बेरोजगारी

अस्थायी बेरोजगारी तब उत्पन्न होती है जब श्रमिक एक उत्पादन प्रक्रिया से दूसरे उत्पादन प्रक्रिया की ओर जाते हैं। नियोक्ता कामगारों की खोज में रहते हैं और कामगार रोजगार की तलाश में रहते हैं। जब तक ये दोनों नहीं मिल जाते तब तक बेरोजगारी बनी रहती है।

बेरोजगारी दूर करने के उपाय Remedies to remove unemployment)

  • भारत में बेरोजगारी दूर करने के लिये निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं
  • जनसंख्या वृद्धि दर पर नियंत्रण लगाना
  • उत्पादन की गति में वृद्धि करना
  • निजी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना
  • शिक्षा को रोजगार परक बनाना
  • कृषि क्षेत्र एवं कृषि से संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देना
  • लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास
  • गांवों में रोजगारोन्मुख नियोजन
  • बहु-फसली कृषि को प्रोत्साहन

वस्तुतः बेरोजगारी दूर करने के लिये यह आवश्यक है कि छात्रों को कौशलयुक्त शिक्षा प्रदान की जाए। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। 90 प्रतिशत रोजगार के अवसरों के लिये व्यावसायिक कौशल की आवश्यकता होती है, जबकि शिक्षा संस्थानों से निकले हुए 90 प्रतिशत लोग केवल किताबी ज्ञान ही प्राप्त किये होते हैं।
भारत में श्रम बल सहभागिता में महिलाओं की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस प्रकार जैसे-जैसे जनांकिकीय लाभांश अधिक होगा, श्रम शक्ति कम हो जाएगी। वर्तमान में सरकार का प्रमुख लक्ष्य गैर-श्रम को कार्यशक्ति में परिवर्तित करना है। इसके लिये बहुत सारे प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

बेरोजगारी दूर करने के मुख्य कार्यक्रम (Major programme to remove unemployment)

  • पंडित दीन दयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम (Pandit Deen Dayal Upadhyaya Skramev Jayate Karyakram)
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana)
  • प्रधानमंत्री युवा योजना (Pradhan Mantri Yuva Yojana)
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act-MGNREGA)

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