बिहार के प्रसिद्ध स्थान | famous places of bihar

बिहार समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से गौरवान्वित है जो इसके कई प्राचीन स्मारकों और कला तथा वास्तुकला से प्रदर्शित होती है। बिहार में जब राजगद्दी मगध साम्माज्य के पास थी तब उससे दो महत्वपूर्ण धर्म प्रकाश में आए एक बौद्ध धर्म और दूसरा जैन धर्म। बिहार में विभिन्न स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं और दुनियाभर से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। बिहार हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख और इस्लाम जैसे विभिन्न धर्मों के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है।
बिहार में पर्यटन के विकास के लिए 1980 में बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) की स्थापना की गई थी।
बिहार में आठ पर्यटन सर्किट हैं- बौद्ध सर्किट, जैन सर्किट, रामायण सर्किट, सूफी सर्किट, गांधी सर्किट, इको सर्किट, सिख सर्किट और शिव शक्ति सर्किट।

बिहार के कुछ महत्वपूर्ण स्थान हैं:

1) महाबोधि मंदिर:

  • यह गया जिले के बोधगया क्षेत्र में स्थित है।
  • इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
  • महाबोधि मंदिर परिसर के मध्य में खड़ा बोधि वृक्ष किसी भी बौद्ध भक्त के लिए सबसे पवित्र स्थल है।
  • लगभग 2600 साल पहले, गौतम बुद्ध को पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, इस वृक्ष को महाबोधि वृक्ष के रूप में जाना जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि मूल महाबोधि मंदिर का निर्माण सम्माट अशोक के बुद्ध के महापरिनिर्वाण के लगभग 250 वर्षों के बाद करवाया था।
  • वर्तमान मंदिर को पहली बार 1883 में सर अलेक्जेंडर कनिंघम के बोधगया के गौरवशाली इतिहास के लिए पुनः स्थापित किया था।
  • यहां मूचालिंडा झील, अनिमेष लोचन स्तूप, वज्रासन आदि अन्य पर्यटन स्थल हैं।

2) नालंदा विश्वविद्यालय ध्वंसावशेष:

  • यह नालंदा जिले में स्थित है।
  • यूनेस्को की विश्व धरोहर है।
  • सबसे प्राचीन आवासीय अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में से एक, जो लगभग 5वीं या छठी शताब्दी से 13वीं शताब्दी तक रहा।
  • चीनी यात्री हवेन त्सांग यहां अध्ययन करने आया था।
  • इसका संरक्षण गुप्त और पाल राजवंशों के राजाओं द्वारा किया गया।
  • हर्षवर्धन (7वीं ई.पू) के शासनकाल में यह सर्वोच्च स्तर पर था।

3) विश्व शांति स्तूप

  • वैशाली जिले में स्थित है।
  • यह सफेद संगमरमर और कंक्रीट से बना है।
  • स्तूप का गुंबद लगभग 125 इंच ऊंचा है और 1969 में रत्नागिरि पहाड़ी की चोटी पर बुद्ध बनाया गया था।
  • गुंबद के चारों ओर बुद्ध की चार स्वर्ण प्रतिमाएं हैं।
  • इसके पास ही बुद्ध के सबसे पसंदीदा ध्यान स्थानों में से एक गृद्धकूट शिखर स्थित है।

4) सप्तपर्णी हिल्स:

  • राजगीर शहर में नालंदा की वैभार पहाड़ी पर स्थित है।
  • पहली बौद्ध परिषद यहां आयोजित की गई थी और बुद्ध की शिक्षाओं पर ग्रंथ लेखन का कार्य किया गया था।
  • सप्तपर्णी गुफाओं के रास्ते में महत्वपर्ण जैन मंदिर भी स्थित हैं।
  • प्राचीन शिव मंदिर के आंशिक खंडहर भी यहां पाए गए हैं।

5) विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अवशेष:

  • भागलपुर जिले में स्थित है।
  • 9 वीं शताब्दी ई.पू से 13 वीं शताब्दी ई.पू तक संरक्षित।
  • पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित किया गया।
  • धर्मशास्त्र, दर्शन, व्याकरण, तत्वमीमांसा, तर्क आदि जैसे विषय यहां पढ़ाए जाते थे परंतु अध्ययन सबसे महत्वपूर्ण शाखा, तंत्रवाद थी।

6) रामपुरवा:

  • यह पश्चिम चंपारण जिले में स्थित है।
  • नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन को सुशोभित करने वाला प्रसिद्ध बल कैपिटल/वृष-स्तंभ शीर्ष यहां स्थित था।

7) विष्णुपद मंदिर:

  • यह गया जिले में स्थित है।
  • भगवान विष्णु को समर्पित हिन्दू मंदिर है।
  • ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु के पदचिहन हैं जिन्हें धर्मशिला के नाम से जाना जाता है, जो बेसाल्ट के
  • एक शिलाखंड में बने हैं।

8) देव-सूर्य मंदिर:

  • यह औरंगाबाद जिले में स्थित है।
  • इसे चंद्रवंशी राजा भैरवेंद्र सिंह द्वारा 8वीं शताब्दी ई.पू में बनवाया गया था।
  • मंदिर का मुख पश्चिम की ओर है।
  • छठ पूजा त्योहार पर यहां आना बहुत ही शुभ माना जाता है।
  • यहां दो कंड हैं-रुद्र कंड और सूर्य कंड। ऐसा माना जाता है कि यहां स्नान करने से कुण्ठ रोग और अन्य बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

9) जानकी मंदिर

  • यह मंदिर सीतामढ़ी जिले में स्थित है।
  • ऐसी मान्यता है कि राजा जनक को सीता एक नवजात शिश के रूप में यहां मिली थी।
  • मंदिर के प्रमुख देवता श्री राम, सीता और हनुमान हैं।
  • मन्दिर के पास में एक कुंड है जिसे जानकी कुंड कहा जाता है।

10) कुण्डलपुर:

  • यह नालंदा जिले में स्थित है।
  • इसे महावीर की जन्मभूमि माना जाता है।
  • यह दिगंबर जैनों के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है।
  • दो मंजिला इमारत में जिन की 72 मूर्तियां हैं।

11) पावापुरी:

  • यह नालंदा जिले में स्थित है।
  • माना जाता है कि महावीर को यहां निर्वाण प्राप्ति हुई थी।
  • इसे अपापुरी के रूप में भी जाना जाता है जिसका अर्थ है ‘पुण्य कर्म स्थान’। यह जैनों में सबसे अधिक प्रसिद्ध स्थलों में से एक है।
  • उत्कृष्ट संगमरमर का यह मंदिर कमल कुंड के मध्य मोती की तरह चमकता है जिसे विवर से रूपांतरित किया गया था।

12) बिहार शरीफ:

  • यह नालंदा जिले में स्थित है।
  • यह सूफी संत मखदूम शरफ़द्दीन अहमद याहया मनेरी की दरगाह है।
  • प्राचीन नालंदा महाविहार के खंडहर, शहर के पास स्थित हैं।
  • पाल साम्राज्य में ओदंतपुरी, बिहार शरीफ के स्थान पर एक प्रमुख बौद्ध मठ विश्वविद्यालय बनाया गया था।

13) सासाराम:

  • यह रोहतास जिले में स्थित।
  • सासाराम कई महान लोगों जैसे सहस्त्रबाहु, शेरशाह सूरी, और बाबू जगजीवन राम से संबंधित है।
  • यहां शेरशाह का मकबरा, रोहतासगढ़ किला, इंद्रपुरी बांध, शेरगढ़ किला, पवित्र ताराचंडी शक्तिपीठ, गुप्त धाम, तुतला भवानी मंदिर आदि यहां स्थित हैं।
  • यह शेरशाह सूरी के मकबरे के लिए प्रसिद्ध है।

14) मनेर शरीफ़:

  • यह पटना में स्थित है।
  • आरंभिक युग में, मनेर अध्ययन का एक केंद्र था और कहा जाता है कि वैयाकरण पाणिनी और वररुची भी यहां रहते हुए अध्ययन करते थे।
  • मनेर में शाह दौलत या मखदूम दौलत का मकबरा है, जिन्हें छोटा दरगाह के नाम से जाना जाता है, और दूसरी शेख याहिया मनेरी या मखदुम याहिया की दरगाह को बड़ी दरगाह कहा जाता है।

15) गोलघर:

  • यह पटना में स्थित बड़ा अन्न भंडार स्थल है।
  • कैप्टेन जॉन गार्स्टिन द्वारा डिज़ाइन किया गया।
  • इसका निर्माण 20 जुलाई 1786 को पूरा हुआ था।
  • स्तूप वास्तुकला में निर्मित भवन की ऊंचाई 29 मीटर है।

16) मनियार मठ:

  • नालंदा के राजगीर में स्थित है।
  • जैन भिक्षु शालिभद्र को समर्पित है।
  • गुप्त काल से संबंधित है।
  • इस स्थल का उल्लेख पाली ग्रंथों और महाभारत में मणि-नाग के रूप में किया गया है।
  • इसे सांपों को समर्पित एक हिंदू मंदिर भी माना जाता था, क्योंकि यहां नागदेव की कई मूर्तियां देखी गई हैं।

17) सीता कुंड:

  • मुंगेर जिले में स्थित है।
  • गर्म जल के झरने को सीता कंड, रामकंड, लक्ष्मण कंड, भरत कुंड और शत्रुघ्न कुंड के रूप में जाना जाता है।
  • ऐसी मान्यता है कि अग्न परीक्षा के बाद देवी सीता आग की लपटों से प्रकट हुई और इस कुंड में उन्होंने स्नान किया।

18) मोतिहारी:

  • पूर्वी चम्पारण में स्थित है।
  • चंपारण सत्याग्रह के आरंभ के रूप में गांधीजी से संबंधित है।
  • 15 अप्रैल 1917 को गांधीजी मोतिहारी पहुंचे और मोतिहारी के जसलपट्टी गांव से आंदोलन शुरू किया।
  • इस आंदोलन के बाद, मोहन दास करम चंद गांधी को ‘महात्मा’ के रूप में जाना जाने लगा।

19) भितिहरवा आश्रम:

  • पश्चिम चंपारण में स्थित है।
  • जब गांधीजी 1917 में चंपारण में थे तब उनके द्वारा सामाजिक कार्य के लिए चयनित केंद्रों में से एक है।
  • यहां एक गांधी आश्रम है जहां महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान रुके थे।
  • मूल रूप से इसे कस्तूरबा सेवा केंद्र के रूप में जाना जाता है, यह आदिवासी महिलाओं और लड़कियों के ज्ञान वर्धन के लिए महात्मा गांधी द्वारा 1917 में स्थापित पहला स्कूल था।

20) गांधी संग्रहालय:

  • पटना में स्थित है।
  • स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी के जीवन और सिद्धांतों तथा बिहार में उनकी भूमिका को दर्शाता है।
  • बिहार में महात्मा गांधी और उनके सत्याग्रह आंदोलन से संबंधित वस्तुएं और कलाकृतियां यहां बड़ी संख्या में संरक्षित हैं।
  • गांधीवादी साहित्य और उनके जीवन तथा कार्यों को दर्शाने वाली तस्वीरों का एक व्यापक संग्रह है।
  • गांधीजी द्वारा प्रयोग किया जाने वाला “चरखा” भी इस संग्रहालय में संरक्षित है।

21) तख्त श्री पटना साहिब:

  • पटना में स्थित है।
  • इसे हरिमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है। यह सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मस्थली है, जिसे महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया था।
  • गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 1666 में पटना में हुआ था। उन्होंने आनंदपुर जाने से पहले अपने शुरुआती साल यहां बिताए थे।
  • गुरु नानक जी और गुरु तेग बहादुर जी के भी पटना का दौरा किया था।

22) वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान:

  • यह पश्चिम चंपारण में स्थित है।
  • यह एक राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिज़र्व और गंडक नदी के तट पर भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एक वन्यजीव अभयारण्य है।
  • यह बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है।
  • यह विभिन्न प्रकार के सरीसृपों, पक्षियों, और तितलियों की विभिन्न प्रजातियों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और जीवों जैसे बाघ, तेंदुए, मत्स्य-विडाल, तेंदुआ बिल्ली, चीतल, सांभर, पाढ़ा, कृष्णमृग, गौर, भालू आदि का घर है।
  • थारू अनुसूचित जनजाति यहां निवास करती है।

23) ककोलत जलप्रपात:

  • यह नवादा जिले में स्थित है।
  • इसकी ऊंचाई लगभग 150 से 160 फीट है।
  • यहां चैत संक्रांति के अवसर पर तीन दिवसीय मेला आयोजित किया जाता है जहां श्रद्धालु झरने में स्नान करते हैं।
  • यह बिहार का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।

24) गोगाबेल झील:

  • कटिहार जिले में स्थित है।
  • बिहार की सबसे बड़ी आर्द्रभूमि में से एक है।
  • गोगाबील झील को बिहार का पहला सामुदायिक रिज़र्व घोषित किया गया है।
  • उत्तर में महानंदा और ककर नदी तथा दक्षिण में गंगा नदी है।
  • यहां पक्षियों की 100 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से लगभग 30 प्रवासी हैं।
  • यहां पाई जाने वाली पक्षियों की प्रजातियों में ब्लैक इबिस, एशी स्वेलो श्रीक, जंगल बब्बलर, बैंक मैना, रेड मुनिया, उत्तरी लापविंग और स्पॉटबिल डक शामिल हैं।

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